नई दिल्ली। टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा का सपना कही जाने वाली कार नैनो की छवि अब बदलेगी। खुद टाटा इस पर लगे गरीब आदमी की कार के ठप्पे को हटाना चाहते हैं। राष्ट्रीय राजधानी में गुरुवार को शुरू हुए ऑटो एक्सपो में आए रतन ने संवाददाताओ से बातचीत में साफ कहा कि इस बात की कोशिश की जाएगी कि नैनो की छवि गरीब आदमी की कार के तौर पर न बने। यह भी जानकारी दी कि टाटा मोटर्स बहुत जल्द ंिवश्वविख्यात जगुआर और लैंडरोवर कारों का निर्माण भारत में शुरू कर सकती है।

टाटा के मुताबिक, नैनो की तकनीकी खामियों को भी जल्द दूर कर लिया जाएगा। उन्होंने नैनो की बिक्री बहुत ज्यादा नहीं होने के लिए अपनी कंपनी को ही जिम्मेदार ठहराया। कहा कि शुरुआत में कुछ समस्याएं हुई, जिनका असर बाद तक बना रहा। जहां तक जगुआर और लैंडरोवर कारों की बात है तो कंपनी इसको लेकर कंपनी काफी गंभीर है। अगर ऐसा हो जाता है तो भारत में इन लक्जरी कार ब्रांडों की कीमतें काफी कम हो सकती हैं।

टाटा मोटर्स ने ऑटो एक्सपो में धमाकेदार शुरुआत करते हुए तीन नए वाहन और पांच कांसेप्ट वाहन प्रदर्शित किए हैं। अगले वित्त वर्ष के लिए कंपनी ने स्पो‌र्ट्स यूटिलिटी व्हीकल 'टाटा सफारी स्टॉर्म' और कॉमर्शियल वाहन बाजार के लिए 'टाटा अल्ट्रा' और 'टाटा एलपीटी 3723' नाम से तीन मॉडल पेश किए। कंपनी ने 'टाटा नैनो सीएनजी', 'टाटा इंडिया मांजा डीजल-इलेक्ट्रिक हाइब्रिड', 'टाटा स्टारबस फ्यूल सेल [हाइड्रोजन]' और 'टाटा मैजिक आइरिस सीएनजी' को बतौर कांसेप्ट पेश किया है। ये सारे कांसेप्ट वाहन वैकल्पिक ईधन पर आधारित होंगे।

टाटा संस के वाइस चेयरमैन साइरस मिस्त्री की उपस्थित में रतन टाटा ने बताया कि भारत में हमने लैंडरोवर की असेंबलिंग शुरू कर दी है। अंतत: हम इसका निर्माण भी करना चाहेंगे। हमारे पास जगुआर और लैंडरोवर की तकनीकी है, जबकि भारत में इसे बनाने की अन्य तमाम क्षमताएं मौजूद हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि इन दोनों मॉडलों के निर्माण में अगर संभव हुआ तो कुछ अन्य कार कंपनियों की भी मदद ली जा सकती है। मसलन इंजन बनाने के लिए फिएट का सहयोग लिया जा सकता है। साइरस को हाल ही में रतन टाटा का उत्तराधिकारी घोषित किया गया है।

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