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मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी को किसने दे दी नौकरी, मच गया बवाल; उठने लगे सवाल?

Published: Fri, 25 Sep 2026 08:38 PM (IST)

अनंत अंबानी को न्यूकैसल यूनिवर्सिटी ने सस्टेनेबिलिटी में 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' नियुक्त किया है, जिस पर विवाद छिड़ गया है। ...और पढ़ें

अनंत अंबानी को न्यूकैसल यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस बनाया।

अनंत अंबानी को न्यूकैसल यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस बनाया।

HighLights

  1. अनंत अंबानी को न्यूकैसल यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस बनाया।

  2. सस्टेनेबिलिटी में नियुक्ति पर कई विशेषज्ञों ने सवाल उठाए।

  3. 'वंतारा' पहल को लेकर संरक्षणवादियों ने आपत्ति जताई है।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत के दूसरे सबसे बड़े अरबपति मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी इस समय चर्चा का विषय बने हुए हैं। चर्चा का कारण है उनकी नौकरी। जी हां, आपने सही पढ़ा। दरअसल, उन्हें किसी ने नौकरी दी है। ये नौकरी ऐसी-वैसी नहीं है। आइए जानते हैं कि आखिर अनंत अंबानी को नौकरी देने वाली संस्था कौन सी है और उन्हीं मिली इस नौकरी पर सवाल क्यों उठने लगे।

ब्रिटेन की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी ने 14 सितंबर को अनंत अंबानी को सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' बनाया। प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस का पद शोध पद नहीं है। विश्वविद्यालय इन्हें शिक्षाविदों के बजाय प्रैक्टिकल प्रोफेशनल को प्रदान करते हैं। यह पद आमतौर पर शॉर्ट टर्म के लिए होता है। जब से अनंद अंबनी को यह पद या फिर कहें नौकरी मिली है तब से बवाल मचा हुआ है। लोग न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं।

यूनिवर्सिटी ने कही यह बात

न्यूकैसल यूनिवर्सिटी ने 14 सितंबर को कहा कि उसने अंबानी को सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊपन) के क्षेत्र में 'प्रोफेसरशिप ऑफ प्रैक्टिस' से सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें एक ज्यादा टिकाऊ भविष्य को आगे बढ़ाने में उनके अहम योगदान के लिए दिया गया है।

उत्तरी इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ने कहा, "वंतारा में हो रहा काम, ग्लोबल संरक्षण और बायोडायवर्सिटी लक्ष्यों पर यूनिवर्सिटी की वर्ल्ड-क्लास रिसर्च से काफी हद तक मेल खाता है।"

न्यूकैसल ने कहा कि यह सम्मान 'वंतारा' (उनके वाइल्डलाइफ रेस्क्यू इनिशिएटिव) के जरिए संरक्षण, बायोडायवर्सिटी की सुरक्षा, जानवरों की भलाई और पर्यावरण की देखभाल में अंबानी के योगदान, और रिलायंस को ग्रीन एनर्जी की ओर ले जाने में उनकी भूमिका को मान्यता देता है।

न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के निर्णय पर उठ रहे सवाल

भारतीय इतिहासकार और भारतीय पर्यावरणवाद की शुरुआत पर किताब लिखने वाले रामचंद्र गुहा ने इसे "काफी हैरान करने वाला फैसला" बताया और कहा कि वे ऐसे कम से कम पचास, और शायद सौ लोगों के नाम बता सकते हैं जो इस सम्मान के लिए ज्यादा काबिल हैं।

अवैध वन्यजीव व्यापार की जांच करने वाले भुवन मंगलौर, जो एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी में 'वंतारा' पर रिसर्च पेपर लिख रहे हैं, ने पूछा: "क्या यह कोई मजाक है?"

ससेक्स यूनिवर्सिटी से जुड़ी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज की रिसर्चर लाइला मेहता ने गुरुवार (24 सितंबर) को सोशल मीडिया पर कहा, "न्यूकैसल यूनिवर्सिटी यहां सचमुच बहुत नीचे गिर रही है और सस्टेनेबिलिटी का मजाक उड़ा रही है।"

वाइल्डलाइफ कंजर्वेशनिस्ट प्रेरणा सिंह बिंद्रा ने 3,500 एकड़ (1,416 हेक्टेयर) में फैले 'वंतारा' को कंजर्वेशन साइट बताए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह जानवरों को कैद में रखने की जगह है, यानी एक चिड़ियाघर है। तो फिर यह संरक्षण कैसे हुआ? हमें जंगली जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में बचाने की जरूरत है, न कि चिड़ियाघरों में।"

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