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मिडिल ईस्ट संकट गहराया तो भारत को लगेगा तगड़ा झटका: मूडीज की चेतावनी, रुपया कमजोर होगा, महंगाई भी बढ़ेगी

Published: Fri, 06 Mar 2026 02:35 PM (GMT+05:30)

रेटिंग एजेंसी मूडीज ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष से भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर ...और पढ़ें

मिडिल ईस्ट संकट गहराया तो भारत को लगेगा तगड़ा झटका: मूडीज की चेतावनी, रुपया कमजोर होगा, महंगाई भी बढ़ेगी

मिडिल ईस्ट संकट गहराया तो भारत को लगेगा तगड़ा झटका: मूडीज की चेतावनी, रुपया कमजोर होगा, महंगाई भी बढ़ेगी

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नई दिल्ली| मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष का असर भारत की अर्थव्यवस्था (Middle East conflict India economy) पर पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s Ratings) ने चेतावनी दी है कि अगर इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ा तथा ऊर्जा कीमतों में उछाल आया, तो भारत में रुपए पर दबाव, महंगाई में बढ़ोतरी और चालू खाता घाटा (rupee inflation CAD Moody's) बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है।

मूडीज के मुताबिक यह जोखिम इसलिए ज्यादा है, क्योंकि भारत कच्चे तेल और एलएनजी के लिए पश्चिम एशिया पर काफी हद तक निर्भर है। एजेंसी ने कहा कि बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में भारत उन देशों में शामिल है जो ऊर्जा आयात के लिए इस क्षेत्र पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं।

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz India impact) में जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। यह जलडमरूमध्य इस क्षेत्र से कच्चे तेल और एलएनजी के निर्यात का सबसे अहम समुद्री मार्ग माना जाता है।

रेटिंग एजेंसी ने क्या-क्या कहा?

मूडीज ने अपनी टिप्पणी में कहा,

महंगे ऊर्जा आयात से रुपए पर दबाव बढ़ेगा, महंगाई तेज (India inflation oil spike) हो सकती है और चालू खाता संतुलन भी बिगड़ सकता है। इससे मौद्रिक नीति और सरकारी वित्तीय प्रबंधन दोनों ज्यादा जटिल हो सकते हैं।"

100 डॉलर के ऊपर जा सकती है कीमत

एजेंसी ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया का मौजूदा संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा जोखिम बन सकता है। फिलहाल ऊर्जा ढांचे को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते समुद्री परिवहन काफी हद तक रुक गया है और कुछ क्षेत्रीय बंदरगाहों ने अपने परिचालन भी अस्थायी रूप से रोक दिए हैं।

मूडीज के मुताबिक अगर यह व्यवधान कुछ हफ्तों से ज्यादा समय तक जारी रहता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है, जिससे भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

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