पणजी, आइएएनएस। सरकार स्टार्ट-अप कंपनियों में पेंशन फंड के एक हिस्से के निवेश को इजाजत देने पर विचार कर रही है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआइआइटी) के सचिव गुरु प्रसाद महापात्र ने कहा कि इसके लिए सरकार एक अंतर-मंत्रालयी विमर्श की प्रक्रिया शुरू करेगी। इसके तहत इस बात पर विचार किया जाएगा कि क्या स्टार्ट-अप कंपनियों में पेंशन फंड के एक छोटे हिस्से के निवेश की इजाजत दी जानी चाहिए या नहीं।

महापात्र के मुताबिक उद्योग जगत ने सरकार के समक्ष यह तर्क रखा है कि विदेशी पेंशन फंड्स को भारतीय स्टार्ट-अप कंपनियों में निवेश की इजाजत है। फिर ऐसी ही इजाजत घरेलू पेंशन फंड्स को देने में क्या दिक्कत है। सचिव ने इसकी वजह यह बताई कि विदेशी पेंशन फंड्स को अपनी घरेलू स्टार्ट-अप कंपनियों से जितना रिटर्न मिलता है, उसके मुकाबले भारतीय कंपनियां बहुत ज्यादा रिटर्न देती हैं। इसलिए विदेशी पेंशन फंड्स भारतीय कंपनियों में निवेश करते हैं। लेकिन भारतीय बाजार में पेंशन फंड्स संवेदनशील हैं, क्योंकि इनसे कामकाजी लोगों की जिंदगीभर की गाढ़ी कमाई जुड़ी हुई है। ऐसे में कई बार पेंशन फंड को लेकर बेहद संरक्षणवादी रवैया अपनाना पड़ता है।

यही वजह है कि भारतीय पेंशन फंड्स मुख्य रूप से सरकारी बांड्स में निवेश करते हैं, जहां रिटर्न निश्चित होता है। हालांकि मंत्री ने उद्योग को आश्वस्त किया है कि पेंशन फंड के छोटे से हिस्से का निवेश स्टार्ट-अप कंपनियों में किए जाने पर विचार की गुंजाइश है।

गोवा में संपन्न वेंचर कैपिटल मीट के दौरान उद्योग जगत ने मंत्री के समक्ष यह मामला रखा है। सैद्धांतिक रूप से यह विचार बेहद आकर्षक अवसर की तरह है। अगर ऐसा होता है तो स्टार्ट-अप कंपनियों के लिए फंड की किल्लत का एक हद तक समाधान हो जाएगा। इसकी वजह यह है कि भारत में पेंशन और इंश्योरेंस उद्योग और फंड्स का आकार बहुत बड़ा है।

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