नई दिल्ली। केंद्र में मोदी सरकार ने अपना एक वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है और इस दौरान सरकार ने आम जनता के हित के लिए कई कदम उठाए हैं। हालांकि विपक्ष लगातार सरकार के कामों पर सवाल उठा रहा है।

विपक्ष का कहना है कि सरकार अपने कामों को ठीक से नहीं कर रही है और यूपीए सरकार के कामों का प्रचार नाम बदलकर रही है। विपक्ष भले ही सवाल उठा रहा हो, लेकिन अब सामने आए आकड़ें कुछ और ही बयां कर रहे हैं। आकड़ों के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है।

मैन्यूफैक्चरिंग से बढ़ी अर्थव्यवस्था की रफ्तार
मेक इन इंडिया के जरिये देश को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने का उद्देश्य लेकर चलने वाली मोदी सरकार के लिए पहले साल के आंकड़े उत्साहजनक रहे हैं। खासतौर पर मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में वृद्धि दर के आंकड़े चौंकाने वाले रहे हैं। 2014-15 में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर 7.1 फीसद हासिल करने का अनुमान लगाया गया है। इसके बीते साल इस क्षेत्र की वृद्धि दर 5.3 फीसद रही थी।

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बीते साल की चौथी तिमाही अर्थव्यवस्था में बदलाव के संकेत लाने के लिहाज से महत्वपूर्ण रही है। जनवरी से मार्च 2015 की इस अवधि में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर 8.4 फीसद रही है। इसके चलते पूरे साल के आंकड़ों में आश्चर्यजनक रूप से तब्दीली दर्ज की गई है।

बीते साल मई में केंद्र में सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया के नारे के साथ देश में मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया था। इसके पीछे न केवल भारत को मैन्यूफैक्चरिंग हब में तब्दील करना था बल्कि इसके जरिये युवाओं को रोजगार दिलाना भी प्रमुख उद्देश्य था।

'अर्थव्यवस्था कमजोर नहीं है'
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अर्थव्यवस्था की स्थिति पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान को खारिज करते हुए कहा है कि सुस्त वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेज गति से विकास कर रही है। ऐसे में इसे कमजोर कहना वाजिब नहीं है।

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जीडीपी के आंकड़े आने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में वित्त मंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया में आर्थिक माहौल में सुस्ती बरकरार है। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़ रही है। वित्त मंत्री ने कहा कि चौथी तिमाही के आंकड़े बताते हैैं कि अर्थव्यवस्था सुधार की तरफ बढ़ रही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि इन आंकड़ों का सबसे बेहतरीन पक्ष मैन्यूफैक्चरिंग में सुधार रहा है। चौथी तिमाही में इसने 8.4 फीसद की वृद्धि दर हासिल की है। जबकि वित्त वर्ष 2014-15 में इसके चलते मैन्यूफैक्चरिंग की वृद्धि दर 7.1 फीसद हो गई है।

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वित्त मंत्री ने कहा कि मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र के आंकड़े बताते हैैं कि आगे चलकर हम आठ से नौ फीसद की वृद्धि दर प्राप्त कर सकते हैैं। जेटली ने कहा कि सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर दहाई के अंक की तरफ बढ़ रही है। जबकि मैन्यूफैक्चरिंग में भी वृद्धि के संकेत हैैं। इससे भविष्य में मेक इन इंडिया की सफलता सुनिश्चित होती दिखाई दे रही है।

प्राकृतिक आपदाओं ने बिगाड़ी खेती की तस्वीर
मोदी सरकार के लिए खेती का पहला साल बहुत खराब साबित हुआ है। बीते वित्त वर्ष का खरीफ सीजन सूखे की चपेट में रहा तो रबी सीजन की फसलें बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गईं। इन प्राकृतिक आपदाओं ने समूची खेती की तस्वीर बिगाड़ कर रख दी है।

सरकार का अग्रिम अनुमान था कि खेती की विकास दर 1.1 फीसद रहेगी, लेकिन हालत इससे कहीं ज्यादा खराब रही। वर्ष 2014-15 में समूचे कृषि क्षेत्र की विकास दर चिंताजनक स्तर 0.2 फीसद पर पहुंच गई। वर्ष 2013-14 के मुकाबले 2014-15 में कृषि क्षेत्र की पैदावार 25.7 करोड़ टन के मुकाबले 5.4 फीसद की गिरावट के साथ 25.1 करोड़ टन ही रहने का अनुमान है।

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