नई दिल्ली(नितिन प्रधान)। घरेलू इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की नीति के तहत सरकार मोबाइल हैंडसेट निर्माण के साथ उसके स्वदेशीकरण पर भी जोर दे रही है। सरकार के चरणबद्ध मैन्यूफैक्चरिंग कार्यक्रम के तहत ऐसी इकाइयां स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है, जो मोबाइल हैंडसेट के कलपुर्जो का निर्माण करती हैं। स्वदेशीकरण से मोबाइल हैंडसेट में वैल्यू एडीशन होगा तो कारोबार तो बढ़ेगा ही, इससे नौकरियों के ज्यादा अवसर पैदा होंगे।

सरकार के इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का मानना है कि अगले वित्त वर्ष 2019-20 तक देश में बनने वाले फीचर फोन में स्वदेशी कलपुर्जो का इस्तेमाल मौजूदा 15 फीसद से बढ़कर 37 फीसद हो जाएगा। स्मार्टफोन के निर्माण में भी स्वदेशी कलपुर्जो की हिस्सेदारी मौजूदा 10 फीसद से बढ़कर 26 फीसद हो जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का मानना है कि सरकार मोबाइल हैंडसेट निर्माण के लिए घरेलू स्तर पर पूरा इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है। इसी रणनीति के तहत घरेलू स्तर पर कलपुर्जे बनाने वाली इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मंत्रालय ने इसके लिए विशेष तौर पर चरणबद्ध मैन्यूफैक्चरिंग प्रोग्राम शुरू किया है। 2016-17 से लागू इस कार्यक्रम के पहले चरण में चार्जर, एडॉप्टर, बैटरी पैक और वायर्ड हैंडसेट बनाने वाली इकाइयों की स्थापना पर जोर दिया गया। दूसरे चरण में 2017-18 में मैकेनिक्स, डाई कट पार्ट्स, माइक्रोफोन व रिसीवर, की-पैड, यूएसबी केबल बनाने वाली इकाइयों पर फोकस रहा। चालू वित्त वर्ष 2018-19 में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली, कैमरा मॉड्यूल, कनेक्टर्स निर्माण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अगले वर्ष डिस्प्ले असेंबली, टच पैनल, कवर ग्लास असेंबली से लेकर वाइब्रेटर मोटर और रिंगर बनाने वाली इकाइयों पर फोकस रहेगा।

मंत्रालय का मानना है कि देश में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण के लिए प्रोत्साहन नीति के अच्छे नतीजे दिख रहे हैं। 2014-15 में देश में 29.2 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर का उत्पादन हुआ था। 2016-17 तक 49.5 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह देश में मोबाइल हैंडसेट और अन्य कलपुर्जे बनाने वाली इकाइयों की संख्या में भी तेज वृद्धि हुई है। मंत्रालय के मुताबिक 2014 में देश में ऐसी इकाइयों की संख्या मात्र दो थी, जो आज की तारीख में 115 हो गई है।

Posted By: Surbhi Jain

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