नई दिल्ली, पीटीआइ। वित्त मंत्रालय ने राज्यों के वित्त मंत्रियों की दो समितियों का गठन किया है। ये समितियां वर्तमान टैक्स स्लैब और जीएसटी से छूट वाले सामानों की समीक्षा करेंगी। इसके साथ ही जीएसटी चोरी की आशंका वाले क्षेत्रों की पहचान करेंगी और आईटी सिस्टम में बदलावों की जरूरत को लेकर भी सुझाव देंगी। दरों को और तर्कसंगत बनाने के लिए गठित मंत्रियों की समिति इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की समीक्षा के साथ-साथ टैक्स रेट स्लैब के मर्जर सहित दरों को और तार्किक बनाने को लेकर अपनी और से सिफारिश करेगी।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी बोम्मई की अध्यक्षता वाली इस समिति में पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा, केरल के वित्त मंत्री के एन बालागोपाल, बिहार के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद सहित कुल सात सदस्य होंगे। यह समिति दो महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।

यह समिति ऐसे वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति की भी समीक्षा करेगी, जिसे वस्तु एवं सेवा कर (GST) से छूट प्राप्त है। इसका मकसद टैक्स के आधार का विस्तार करना है।

दूसरी ओर, GST सिस्टम में सुधार को लेकर गठित मंत्रियों की समिति टैक्स चोरी की आशंका वाले पहलुओं को चिह्नित करेगी और बिजनेस प्रोसेसेज और आईटी सिस्टम्स में सुधार की गुंजाइश की सिफारिश करेगी। इसका लक्ष्य राजस्व को हो रहे नुकसान को कम करना है।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अगुवाई वाली इस समिति में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, तमिलनाडु के वित्त मंत्री पी टी राजन और छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री टी एस सिंह देव सहित कुल आठ सदस्य शामिल होंगे।

यह समिति टैक्स विभाग के पास उपलब्ध आईटी टूल्स और इंटरफेस की समीक्षा करेगी और उन्हें अधिक प्रभावी बनाने के उपाय सुझाएगी। इसके अलावा यह समिति बेहतर कर अनुपालन के लिए डेटा एनालिसिस के हरसंभव इस्तेमाल की गुंजाइस तलाशेगी और केंद्र एवं राज्य के कर अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय के मार्ग सुझाएगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल की 17 सितंबर को आयोजित बैठक में मंत्रियों के दो समूह के गठन का फैसला किया गया था।

Edited By: Ankit Kumar