नई दिल्ली। आज से कुछ साल पहले अगर बाजार में आप मोबाइल फोन लेने जाते थे तो आपके सामने गिने-चुने नाम ही सामने दिखते थे। मार्केट में नोकिया, सैमसंग और सोनी के अलावा कोई और विकल्प मौजूद ही नहीं था। लेकिन अब कुछ देसी कंपनियों ने इनकी कमर तोड़ दी। ये बात भी रही है कि भारत में स्मार्टफोन का बाजार विदेशी कंपनियों ने ही खड़ा किया लेकिन उसका फायदा अब देसी कंपनियां उठा रही हैं।

आईडीसी की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन बाजार में माइक्रोमैक्स और कार्बन की बाजार हिस्सेदारी सैमसंग और एप्पल से तेजी से बढ़ी। साल 2013 की दूसरी तिमाही के दौरान माइक्रोमैक्स और कार्बन ने मिलकर सैमसंग के बाजार पर सेंध मार दी है। रिपोर्ट में कहा गया कि सैमसंग के नये ग्लैक्सी स्टार की वजह से कंपनी की बिक्री में इजाफा हुआ है। वर्तमान में सैमसंग की बाजार हिस्सेदारी गिरकर 26 फीसद है रह गई, जबकि 2013 की पहली तिमाही में यह आंकड़ा 32.7 फीसद थी। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सैमसंग की कैश बैक और बिना ब्याज पर इएमआई की सुविधा कंपनी के लिए कारगर साबित हुई।

माइक्रोमैक्स लगातार दूसरे पायदान पर बना हुआ है और करीब 20 लाख मोबाइल फोन बेचे। फैबलेट और कैनवस सीरिज की मदद से माइक्रोमैक्स की बाजार हिस्सेदारी 22 फीसद पर पहुंच गई है। यानी अब सैमसंग और माइक्रोमैक्स के बीच का अंतर ज्यादा नहीं बचा है।

देश की दूसरी घरेलू हैंडसेट निर्माता कार्बन ने भी तेजी से तरक्की की है। स्मार्टफोन बाजार में कार्बन टॉप पांच की सूची में शामिल हो गई। भारत में कार्बन की बाजार हिस्सेदारी 13 फीसद हो चुकी है, जबकि इससे पिछली तिमाही में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 10.9 फीसद थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्बन के नये टाइटेनियम सीरिज ने बाजार का रुख सस्ते मोबाइल फोन की ओर झुका दिया।

वहीं, एक समय पर मार्केट लीडर कही जाने वाली नोकिया की स्थिति कमजोर होती जा रही है। स्मार्टफोन बाजार में नोकिया 5 फीसद हिस्सेदारी के साथ चौथे पायदान पर है। हालांकि, नोकिया लूमिया ने कंपनी को काफी सराहा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से पांचवे स्थान पर सोनी का नाम आया है।

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