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मेट्रो से ले जाने वाले सामान पर भी ई-वे बिल, GST काउंसिल 7 अक्टूबर को इस पर कर सकती है विचार

Published: Sun, 27 Sep 2026 10:30 PM (IST)

जीएसटी काउंसिल 7 अक्टूबर को मेट्रो रेल नेटवर्क से सामान के ट्रांसपोर्ट के लिए ई-वे बिल लागू करने पर विचार ...और पढ़ें

मेट्रो से ले जाने वाले सामान पर भी ई-वे बिल (प्रतीकात्मक फोटो)

मेट्रो से ले जाने वाले सामान पर भी ई-वे बिल (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. जीएसटी काउंसिल मेट्रो ट्रांसपोर्ट पर ई-वे बिल पर विचार करेगी।

  2. इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स के जीएसटी पर भी चर्चा होगी।

  3. DMRC ने मेट्रो नेटवर्क पर अर्बन फ्रेट सेवा पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| मेट्रो रेल नेटवर्क से ट्रांसपोर्ट होने वाले सामान के लिए जल्द ही ई-वे बिल जेनरेट किए जा सकते हैं, क्योंकि GST काउंसिल ट्रांसपोर्ट के तरीकों में मेट्रो रेल को शामिल करने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। काउंसिल से यह भी उम्मीद है कि वह GST लगाने के लिए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट (IPR) के परमानेंट ट्रांसफर से जुड़ी अस्पष्टता को दूर करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा करेगी।

काउंसिल की बैठक 7 अक्टूबर को होनी है। काउंसिल की लॉ कमिटी ने कई अन्य प्रस्तावों के साथ-साथ इन दोनों प्रस्तावों पर भी अपनी सिफारिशें दे दी हैं।

ई-वे बिल से क्या होता है?

ई-वे बिल एक इलेक्ट्रॉनिक डॉक्यूमेंट है जो पोर्टल पर बनाया जाता है और सामान की आवाजाही का सबूत होता है। इससे यह भी पता चलता है कि ले जाए जा रहे सामान पर टैक्स चुकाया गया है या नहीं। CGST नियम, 2017 के नियम 138 के अनुसार, सामान की आवाजाही (जो ज़रूरी नहीं कि सप्लाई के कारण ही हो) में शामिल हर रजिस्टर्ड व्यक्ति को ई-वे बिल बनाना जरूरी है, अगर कंसाइनमेंट की कीमत ₹50,000 से ज्यादा है। राज्य के अंदर आवाजाही के लिए यह सीमा कम हो सकती है।

अभी के नियमों के अनुसार, अगर रेलवे, हवाई जहाज या जहाज से एक निश्चित कीमत से ज्यादा का सामान भेजा जाता है, तो उसके लिए ई-वे बिल जरूरी है। हालांकि GST नियमों में 'रेलवे' शब्द को साफ तौर पर परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन DMRC (दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन) समेत मेट्रो रेल सिस्टम कानूनी तौर पर भारतीय रेलवे से अलग हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, DMRC को काम-काज में होने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए नियम में 'मेट्रो रेल' शब्द को शामिल करने का यह एक मुख्य कारण है। एक अधिकारी ने बताया, "DMRC ने 'अर्बन फ्रेट सर्विसेज' के जरिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बनाई है, जिसमें मेट्रो नेटवर्क का इस्तेमाल 'मिडिल-माइल कनेक्टिविटी' (एक जगह से दूसरी जगह तक सामान पहुंचाने के बीच के चरण) के तौर पर किया जाएगा।

ई-वे बिल पोर्टल खास तौर पर भारतीय रेलवे के लिए बनाया गया है और यह मेट्रो रेल सिस्टम से सामान की आवाजाही के लिए पूरी तरह से उपयुक्त नहीं है, जिससे काम-काज में दिक्कतें आती हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि इस कदम से दूसरे शहरों की मेट्रो को भी फायदा हो सकता है।

भारत का मेट्रो रेल नेटवर्क

भारत का मेट्रो रेल नेटवर्क 26 शहरों में लगभग 1,170 किलोमीटर तक फैल चुका है और अगले दो सालों में यह अमेरिका से आगे निकल सकता है। भारत अभी अमेरिका से सिर्फ 216 किलोमीटर पीछे है, जिसका मेट्रो रेल नेटवर्क लगभग 1,386 किलोमीटर का है। चीन लगभग 8,000 किलोमीटर के अर्बन रेल नेटवर्क के साथ बहुत आगे है।