जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अभी दुनिया भर में खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हुई हैं और खाद्य वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization, WTO) दुनिया के उन 21 देशों को जिम्मेदार बता रहा है जिन्होंने खाद्य वस्तुओं के निर्यात पर पूरी तरह से पाबंदी लगा रखी है। यही नहीं खाने-पीने की चीजों की बर्बादी भी एक बड़ी वजह है जिस पर लगाम लगाकर समस्‍या को विकराल होने से रोका जा सकता है। 

विकसित देश भी जिम्‍मेदार 

दुनिया के विकसित देशों के घरों में प्रति व्यक्ति खाने-पीने की चीजों की बर्बादी भी भारत के मुकाबले काफी अधिक होती है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के आंकड़ों के मुताबिक आस्ट्रेलिया में सालाना प्रति व्यक्ति 102 किलोग्राम खाने को बर्बाद कर दिया जाता है।

कहां कितनी बर्बादी  

वहीं ब्रिटेन में प्रति व्यक्ति खाने की सालाना बर्बादी 77 किलोग्राम, सऊदी अरब में 105 किलोग्राम, फ्रांस में 85 किलोग्राम, चीन में 64 किलोग्राम, जापान में 64 किलोग्राम, जर्मनी में 75 किलोग्राम, कनाडा में 79 किलोग्राम की है। भारत के घरों में प्रति व्यक्ति सालाना 50 किलोग्राम तो दक्षिण अफ्रीका में 40 किलोग्राम खाने की बर्बादी होती है।

जून में WTO की बैठक

दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक फोरम के एक कार्यक्रम में डब्ल्यूटीओ की महानिदेशक गोजी ओकोंजो ने बुधवार को कहा कि दुनिया के 21 देशों ने खाद्य पदार्थों के निर्यात पर पूरी तरह से पाबंदी लगा रखी है। जून में होने वाली डब्ल्यूटीओ की मिनिस्ट्रियल सम्मेलन में इन देशों से निर्यात पर पाबंदी हटाने के लिए कहा जाएगा।

इन देशों ने लगाया निर्यात पर प्रतिबंध

खाद्यान पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों में कजाख्स्तान, कैमरून, अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, टर्की, मिस्र, इरान, घाना, कुवैत, रूस, यूक्रेन, हंगरी, लेबनान, अजरबाइजान पाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं।

इसलिए खाद्य पदार्थों की हुई कमी

इन देशों ने मुख्य रूप से गेहूं, चीनी, कार्न, सोयाबीन, सनफ्लावर, सब्जी, चावल, मक्का, आलू, टमाटर, प्याज, मशरूम, मांस, आटा, चिकन मीट, फल, अंडे, मवेशी, पाम ऑयल जैसी चीजों के निर्यात पर पाबंदी लगाई है। इन वजहों से भी वैश्विक स्तर पर खाद्य पदार्थों की कमी हो गई है और दुनिया भर के देशों में खाने-पीने की चीजें महंगी होती जा रही है।

मदद से पीछे नहीं हटेगा भारत

दुनिया के देश और डब्ल्यूटीओ भारत की तरफ से भी गेहूं निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध पर सवाल उठा रहे हैं। इस संबंध में भारत ने कहा है कि गेहूं के निर्यात बाजार में भारत की हिस्सेदारी मात्र 0.47 फीसद है। इन सबके बावजूद भारत जरूरतमंद देशों को गेहूं देने से पीछे नहीं हटेगा। गेहूं निर्यात के विश्व बाजार में 75 फीसद से अधिक हिस्सेदारी रूस, अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, यूक्रेन, आस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना की है।

Edited By: Krishna Bihari Singh