नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। प्रॉपर्टी बाजार में खरीद-फरोख्त को लेकर होने वाले फर्जीवाड़ा और बेनामी संपत्ति से निपटने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। दरअसल, सरकार आधार को प्रॉपर्टी से लिंक करने की तैयारी में है। अगर ऐसा होता है तो यह काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ एक बड़ा कदम होगा। 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से काले धन पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है और इसकी जद में आने वाले पहला सेक्टर रियल एस्टेट है। रियल एस्टेट क्षेत्र में काले धन के बढ़ते प्रभाव से प्रॉपर्टी की कीमतें गिर गईं और यह आर्थिक मंदी का एक प्रमुख कारण रहा है। 

प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट से यह जनता के लिए अधिक किफायती हो गया है, खासकर ऐसे समय में जब सरकार 2022 तक हाउसिंग फॉर ऑल लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। ऐसी खबरें हैं कि सरकार आधार को प्रॉपर्टी से जोड़ने के लिए कानून लाने के अंतिम चरण में है। अगर ऐसा होता है, तो यह कदम 'बेनामी' (प्रॉक्सी) लेनदेन को खत्म कर देगा और इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही इससे प्रॉपर्टी और अधिक सस्ती हो जाएगी। माना जा रहा है कि प्रॉपर्टी से जुड़े मामले राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हैं, इसलिए केंद्र सरकार मॉडल कानून बनाकर राज्यों को देगी।

NAREDCO महाराष्ट्र के अध्यक्ष राजन बंडेलकर ने कहा कि आधार को प्रॉपर्टी से लिंक करने से लेन-देन में आसानी होगी और यह फाइनेंस के तौर पर भी मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि आधार-प्रॉपर्टी लिंकिग से बढ़ी हुई पारदर्शिता की वजह से घर खरीदने से जुड़ी प्रक्रियाओं जैसे होम लोन, प्रॉपर्टी लेनदेन, बिक्री या संपत्ति की खरीद आदि में आसानी होगी। हालांकि, लिंक करने की प्रक्रिया में समय लगेगा।

Posted By: Nitesh

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