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Make in India के 12 साल: मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में भारत ने गाड़े झंडे, दुनिया मान रही लोहा

By IANSEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Fri, 25 Sep 2026 02:30 PM (IST)Updated: Fri, 25 Sep 2026 02:49 PM (IST)

मेक इन इंडिया योजना ने 12 साल पूरे कर लिए हैं, जिसने देश को मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और इनोवेशन में वैश्विक शक्ति बनाने का लक्ष्य रखा था।

मेक इन इंडिया योजना ने सफलतापूर्वक 12 वर्ष पूरे किए।

मेक इन इंडिया योजना ने सफलतापूर्वक 12 वर्ष पूरे किए।

HighLights

  1. मेक इन इंडिया योजना ने सफलतापूर्वक 12 वर्ष पूरे किए।

  2. इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 7 गुना, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग 32 गुना बढ़ी।

  3. भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता।

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। देश में बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए लाई गई ‘मेक इन इंडिया’ स्कीम को शुक्रवार को 12 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस योजना को 25 सितंबर, 2014 को लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य देश को मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और इनोवेशन में ग्लोबल बनाना है।

इस योजना के आने के बाद से देश के कई सेक्टर में बड़ा बदलाव आया है। इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में उत्पादन कई गुना बढ़ गया है। वहीं, ऑटोमोबाइल और कैपिटल गुड्स जैसे क्षेत्रों में उत्पादन में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।

इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 7 गुना और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग 32 गुना हुई

देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले सात गुना बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसमें मोबाइन फोन उत्पादन करीब 32 गुना बढ़कर 6.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो कि पहले 18,900 करोड़ रुपये था। अब वॉल्यूम के हिसाब से देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर बना गया है।

कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 2025-26 में करीब 15.8 गुना बढ़ा है। देश में कच्चे स्टील का उत्पादन 2014-15 में 81.7 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 170.0 मिलियन टन हो गया है। वहीं, वाहनों का उत्पादन 2014-15 के मुकाबले 2024-25 में 33 प्रतिशत बढ़कर 31.03 मिलियन यूनिट्स तक पहुंच गया है। इस दौरान यात्री और वाणिज्यिक वाहनों का उत्पादन 65 प्रतिशत बढ़ा है।

दोपहिया वाहनों का उत्पादन 30 प्रतिशत और तिपहिया वाहनों का उत्पादन 71 प्रतिशत बढ़ा है। इसके अलावा, भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया में तीसरे और वैल्यू के हिसाब से 11वें स्थान पर है।

पिछले पांच वर्षों में 9.2 प्रतिशत की औसत दर से बढ़ते हुए, 2025-26 में सालाना टर्नओवर 5,08,630 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। 2025-26 के दौरान फार्मास्युटिकल निर्यात 2,62,697 करोड़ रुपए रहा है। मेडिकल डिवाइस का घरेलू उत्पादन 48.2 प्रतिशत बढ़ा है यह 2019-20 में करीब 28,000 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 41,500 करोड़ रुपए हो गया।

भारतीय रेलवे ने 2014-24 के दौरान 54,809 कोच बनाए। रेलवे कोच का औसत सालाना उत्पादन 2004-14 के दौरान 3,300 से कम था, जो 2014-24 में बढ़कर 5,481 हो गया। घरेलू उत्पादन में लोकोमोटिव और आधुनिक यात्री कोच भी शामिल हैं।

2025-26 में भारतीय रेलवे ने 1,674 लोकोमोटिव बनाए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, स्थिर कीमतों पर मैन्युफैक्चरिंग ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) ने 2022-23 और 2025-26 के बीच 10.88 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की। यह मेक इन इंडिया के तहत देश की तेजी से बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को दिखाता है।

क्या बोले वाणिज्य उद्योग मंत्री पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत न केवल अपनी जरूरतों के लिए विनिर्माण कर रहा है, बल्कि दुनिया के लिए भी उत्पाद तैयार कर रहा है।

गोयल ने कहा, "यह सिर्फ एक उपलब्धि नहीं है। यह हमें याद दिलाती है कि जब कोई देश अपनी क्षमताओं पर विश्वास करता है और सरकार निरंतर सुधारों और ठोस कदमों के जरिए उस विश्वास को मजबूती देती है, तो क्या कुछ हासिल किया जा सकता है। 2014 को पीछे मुड़कर देखें तो भारत की विनिर्माण क्षमता को लेकर होने वाली बहसें याद आ सकती हैं। उस समय भारत में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पाद आयात किए जाते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे हमारी नियति मानने से इनकार कर दिया।"

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