नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अधिकांश टैक्स पेयर इनकम टैक्स और टीडीएस के बीच के अंतर को नहीं समझते हैं। वो यह मानते हैं कि दोनों एक ही चीज होती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। हालांकि इन दोनों का इस्तेमाल सरकार की ओर से टैक्स कलेक्ट करने के लिए ही किया जाता है, लेकिन गणना के लिहाज से दोनों की प्रणाली में अंतर होता है।

ऐसे में जो भी नौकरीपेशा करदाता हैं उन्हें अपने इस भ्रम को दूर कर लेना चाहिए कि दोनों एक ही चीज होती हैं। साथ ही उन्हें इन दोनों की प्रासंगिकता और निहितार्थ को भी समझना चाहिए। अगर आप भी इनकम टैक्स और टीडीएस को लेकर अक्सर कन्फ्यूज रहते हैं तो हम अपनी इस स्टोरी में आपके इसी भ्रम को दूर करने जा रहे हैं।

क्या होता है इनकम टैक्स: आयकर एक अनिवार्य योगदान होता है जो कि नौकरीपेशा व्यक्ति की व्यक्तिगत आय पर लगाया जाता है। इसमें स्टैंडर्ड टैक्स स्लैब का निर्धारण किया गया है उसी के आधार पर आपको इनकम टैक्स देना होता है। यानी व्यक्तिगत आधार पर अलग अलग व्यक्ति की कर देयता अलग अलग होती है।

  • इसके अलावा अगर आपकी आमदनी 50 लाख से 1 करोड़ तक जाती है तो आपको इनकम टैक्स पर 10 फीसद का सरचार्ज भी देना होता है।
  • वहीं जब कुल आय 1 करोड़ की सीमा को क्रॉस कर जाती है जो आपको 15 फीसद का सरचार्ज देना होता है।
  • इसके अलावा हेल्थ एंड एजुकेशन सेस भी इनकम टैक्स पर लागू होगा जो कि 4 फीसद का होगा।

टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स): यह आपके आय के स्रोत यानी की आपकी सैलरी से कटता है। टीडीएस इनकम टैक्स का ही एक हिस्सा होता है जिसका भुगतान करदाता पहले ही कर चुका होता है। इसका सेटलमेंट इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) भरने के दौरान कर दिया जाता है, अगर आपकी सैलरी से कटा टीडीएस आपकी कुल टैक्स देनदारी से ज्यादा होता है तो वह आपको आईटीआर फाइलिंग के जरिए वापस कर दिया जाता है। कुल मिलाकर यह एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसके माध्यम से सरकार करों को तुरंत और कुशलतापूर्वक एकत्र कर सकती है। टीडीएस कटौती आपकी आमदनी, आपको मिले कमीशन, प्रोफेशनल फीस और एफडी पर मिले ब्याज पर होती है।

इनकम टैक्स और टीडीएस में अंतर: टीडीएस कटौती आमदनी होने के साथ ही हो जाती है, यानी टीडीएस का भुगतान करदाता पहले कर देता है, जबकि इनकम टैक्स का भुगतान बाद में किया जाता है। दोनों में कुछ बारीक अंतर होता है..

  • आयकर का भुगतान सालाना करना होता है, जिसकी गणना एक वित्त वर्ष के दौरान यानी सालाना आधार पर की जाती है। वहीं टीडीएस कटौती एक विशेष साल में आवर्ती आधार पर की जाती है।
  • इनकम टैक्स में टैक्स देनदारी करदाता खुद तय कर सकता है और इसका भुगतान वह सीधे सरकार को कर सकता है। वहीं टीडीएस कटौती एक कर की देनदारी का निर्वहन करने का एक अप्रत्यक्ष तरीका है जहां नियोक्ता (नियोक्ता, बैंक, वित्तीय संस्थान) सरकार के लिए कर वसूली की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाते हैं।
  • एक वित्त वर्ष के दौरान एक व्यक्ति (निर्धारिती) की ओर से अर्जित समग्र आय पर इनकम टैक्स लगाया जाता है। वहीं टीडीएस आपकी आय के स्रोत पर लगता है, जिसमें आपकी ओर से एक तय राशि का भुगतान किया जाता है।

By Praveen Dwivedi