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खरीफ फसलों की बुवाई का नया आंकड़ा आया सामने, पैदावार को लेकर बढ़ी चिंता, जानिए दलहन-तिलहन का क्या हाल?

Published: Mon, 03 Aug 2026 02:11 PM (IST)

देश में खरीफ फसलों की बुवाई के नए आंकड़े जारी हुए हैं, जिसमें कुल बुवाई क्षेत्र में पिछले साल की ...और पढ़ें

खरीफ फसलों की बुवाई का नया आंकड़ा आया

खरीफ फसलों की बुवाई का नया आंकड़ा आया

HighLights

  1. कुल खरीफ बुवाई क्षेत्र में 26.50 लाख हेक्टेयर की कमी।

  2. धान, मिलेट्स, दलहन की बुवाई में महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज।

  3. तिलहन और गन्ने की बुवाई में मामूली बढ़ोतरी हुई।

नई दिल्ली| देश में इन दिनों खरीफ फसलों की बुवाई का समय चल रहा है। अब बुवाई लगभग अपने अंतिम चरण में है। नए आंकड़ों के अनुसार भारत में खरीफ सीजन की बुवाई 894.22 लाख हेक्टेयर तक पहुंची गई है, जो पिछले साल की समान अवधि के 920.72 लाख हेक्टेयर की तुलना में 26.50 लाख हेक्टेयर कम है।

इन फसलों की बुवाई में तगड़ी गिरावट

इसमें सबसे बड़ी गिरावट मिलेट्स की बुवाई में 12.83 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। इसके साथ ही खरीफ सीजन की सबसे खास फसल धान की बुवाई (Kharif Soing) में भी अब तक 6.89 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। दलहन फसलों में 6.41 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई है। नकदी फसलों की बुवाई की बात करें तो कपास की बुवाई में 2.52 लाख हेक्टेयर की गिरावट देखी गई है। हालांकि कुछ खास फसलों की बुवाई में बढ़ोतरी भी हुई है, जो कि एक अच्छा संकेत है।

इन फसलों की बुवाई में आई तेजी

खरीफ सीजन के दौरान कमजोर मानसून के चलते बुवाई में गिरावट आई है। बता दें कि कुछ ऐसी भी फसलें रही हैं जिनकी बुवाई के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी देखी गई है। तिलहन फसलों की बुवाई में 1.19 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा खरीफ सीजन की मुख्य फसलों में शामिल गन्ने की फसल में 0.86 लाख हेक्टेयर और जूट जूट एवं मेस्टा के क्षेत्रफल में 0.12 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी देखी गई है।

पैदावार को लेकर बढ़ी चिंता

ताजा खरीफ बुवाई आंकड़ों से संकेत मिलता है कि कुछ फसलों में सुधार के बावजूद कुल बुवाई क्षेत्र अभी भी पिछले साल के स्तर से नीचे है, जिससे कृषि जिंसों की कीमतों को समर्थन मिलने की संभावना बनी हुई है। वहीं, तिलहनों के रकबे में बढ़ोतरी इस खंड में आपूर्ति संबंधी चिंताओं को आंशिक रूप से कम कर सकती है।

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प्रमुख अनाज और दलहन फसलों के कम रकबे के कारण कृषि जिंसों की कीमतों को समर्थन मिलता रह सकता है, हालांकि यदि मौसम अनुकूल बना रहता है तो तिलहनों की बेहतर बुवाई इस क्षेत्र में आपूर्ति संबंधी चिंताओं को कम कर सकती है।