न्यूयॉर्क। वर्ष 2008 के ग्लोबल वित्तीय संकट के जिम्मेदार वित्तीय संस्थानों को अब अपनी कारगुजारियों का हिसाब चुकाना पड़ रहा है। रीयल एस्टेट मॉर्गेज कारोबार में गड़बड़ी करने वाला अमेरिका का सबसे बड़ा बैंक जेपी मॉर्गन अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा हर्जाना भरने पर सहमत हो गया है। इस मामले को निपटाने के लिए बैंक कुल 13 अरब डॉलर [करीब 806 अरब रुपये] का जुर्माना भरेगा। बैंकों और वित्तीय संस्थानों की हेराफेरी की वजह से ही अमेरिका में सब प्राइम संकट खड़ा हुआ जिसने बाद में वित्तीय संकट का रूप ले लिया।

अमेरिकी न्याय विभाग से हुए समझौते के तहत जेपी मॉर्गन इस हर्जाने में से चार अरब डॉलर की रकम उपभोक्ता राहत पैकेज के रूप में जमा करेगा। जबकि चार अरब डॉलर की रकम अमेरिकी फेडरल हाउसिंग फाइनेंस एजेंसी को सौंपी जाएगी। इस एजेंसी के नियमन के दायरे में आने वाली मॉर्गेज फाइनेंस कंपनियों फैनी मे और फ्रेडी मेक को जेपी मॉर्गन ने ऐसी मॉर्गेज संपत्तियों की बिक्री की थी जिनकी गुणवत्ता खराब पाई गई है। बाकी पांच अरब डॉलर की रकम न्याय विभाग और राज्य व संघीय सरकार को जुर्माने के रूप में सौंपी जाएगी।

चार अरब डॉलर के उपभोक्ता राहत पैकेज में से जेपी मॉर्गन ग्राहकों के 1.5 अरब डॉलर के कर्ज माफ करेगा। वहीं, मासिक किस्तों में कमी लाने के लिए लोन की शर्तो में बदलाव करने को 50 करोड़ डॉलर की रकम खर्च की जाएगी। बाकी दो अरब डॉलर की रकम हाउसिंग संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए कम आय वाले लोगों को सस्ते कर्ज उपलब्ध कराने के लिए खर्च की जाएगी।

अमेरिकी न्याय विभाग ने एक बयान में कहा कि यह जुर्माना वित्तीय संकट से पहले बैंक के बर्ताव के लिए उसकी जिम्मेदारी तय करने की ओर एक बड़ा कदम है। जेपी मॉर्गन ने स्वीकार किया है कि उसके बर्ताव के कारण रीयल एस्टेट क्षेत्र में कीमतों का बुलबुला बना। बैंक ने खराब गुणवत्ता की मॉर्गेज प्रतिभूतियां तैयार की और उन्हें निवेशकों को बेचा। निवेशक यह सोचते रहे कि वे सुरक्षित विकल्पों में निवेश कर रहे हैं। मगर जब कर्ज फंसने लगे तब निवेशकों का बैंकिंग तंत्र से भरोसा टूटने लगा और सब प्राइम संकट वित्तीय संकट में बदलने लगा। जेपी मॉर्गन ने यह भी स्वीकार किया है कि उसने जानते हुए भी नियमित रूप से निवेशकों को ऐसी संपत्तियां बेची जो कभी नहीं बेची जानी चाहिए थी।

हालांकि, जेपी मॉर्गन के मुख्य वित्त अधिकारी मैराइन लेक ने कहा कि बैंक ने किसी कानून के उल्लंघन की बात स्वीकार नहीं की है। बैंक ने जो कुछ स्वीकार किया है, उससे नए कानूनी विवादों में पड़ने का खतरा नहीं है।

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