नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। आने वाले दिनों में भारतीय तेल कंपनियों के लिए ईरान से तेल खरीदना मुश्किल हो सकता है। भुगतान की व्यवस्था संभालने वाले भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) ने तेल रिफाइनरियों को जानकारी दी है कि नवंबर से यूरो में भुगतान का रास्ता बंद हो जाएगा। ईरान पर अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के प्रभावी होने से यह समस्या आएगी। पिछले महीने ईरान के साथ ऐतिहासिक परमाणु समझौते से पीछे हटते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 180 दिन में ईरान पर पुन: प्रतिबंध प्रभावी होने का एलान किया था।

अमेरिका की ओर से प्रतिबंध की घोषणा के बाद से ही सरकार के स्तर पर यूरोपीय देशों से इस बारे में बातचीत हो रही है कि ईरान से तेल खरीदने का कारोबार आगे भी चलता रहे। हालांकि अब तक इस दिशा में सफलता के संकेत नहीं मिले हैं। सरकारी क्षेत्र की दो तेल कंपनियों इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) ने एसबीआइ की तरफ से भुगतान की समस्या पर निर्देश मिलने की बात कही है। एसबीआइ ने बताया है कि तीन नवंबर, 2018 के बाद से ईरान से खरीदे गए तेल का भुगतान यूरोपीय मुद्रा यूरो में करने का रास्ता खुला नहीं रहेगा। अभी तेल कंपनियां एसबीआइ को भुगतान करती हैं। फिर एसबीआइ जर्मनी स्थित यूरोपीश-ईरानीश हैंडल्सबैंक एजी के जरिये यूरो में ईरान को भुगतान करता है।

भुगतान की वर्तमान व्यवस्था के हिसाब से अगस्त के आखिर से ही ईरान से तेल आयात प्रभावित हो जाएगा। माना जा रहा था कि यूरोपीय देशों की मदद से भुगतान की व्यवस्था जारी रखी जा सकती है। इस बारे में भारत का एक दल पिछले दिनों यूरोपीय देशों की यात्र पर भी गया था। लेकिन लगता है कि एसबीआइ इस बारे में फिलहाल कोई जोखिम लेने को तैयार नहीं है।

सरकारी तेल कंपनियों के बड़े अधिकारियों ने दैनिक जागरण को बताया कि अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद से ही वह ईरान के तेल विकल्प के तौर पर दूसरे देशों से बात कर रहे हैं। भारत इस वर्ष ईरान से ज्यादा तेल खरीदने की तैयारी कर रहा था। भारत ईरान का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार देश है, जबकि भारत के लिए ईरान तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश है। अब ईरान की कमी सऊदी अरब, रूस और अमेरिका से पूरी की जा सकती है।

यह भी हो सकता है कि ईरान अभी भारत को क्रेडिट पर कच्चा तेल बेचे और बाद में जब सुधर जाएं तो वह उसका भुगतान लेने को तैयार हो जाए। ऐसा वर्ष 2012 में भी हुआ था। तब भारत ने ईरान से आयातित तेल के एक हिस्से का भुगतान अनाज के जरिये किया था। बची हुई राशि का भुगतान कुछ वर्ष बाद किया गया। एक अन्य विकल्प यह है कि ईरान कुल भुगतान का कुछ हिस्सा भारतीय रुपये में स्वीकार कर ले। भारत और ईरान के बीच सीधे बैंकिंग रिश्ते नहीं होने की वजह से ही यह समस्या कुछ गंभीर हो रही है।

Posted By: Praveen Dwivedi