नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने उत्पाद शुल्क घटाकर कारों से लेकर घरेलू उपकरणों की कीमतों में कटौती का रास्ता साफ कर मध्यवर्ग को चुनावी तोहफा तो दे दिया है, लेकिन इससे उद्योग जगत को खास फायदा होता नहीं दिख रहा है। खास तौर पर टीवी, फ्रिज जैसे घरेलू उपकरणों की मांग पर असर पड़ने की संभावना कम है। जानकारों का कहना है कि जब तक ब्याज दरों में कमी की सूरत नहीं बनती है, तब तक न तो घरेलू उपकरणों और न ही कारों की बिक्री में इजाफा होने वाला है। वैसे कुछ और कंपनियों की तरफ से वाहनों की कीमतें कम की गई हैं।

बजटीय घोषणाओं पर इंडिया रेटिंग की तरफ से जारी अध्ययन में कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण बनाने वाली कंपनियों की सबसे बड़ी समस्या महंगा कर्ज और महंगाई है। महंगाई की वजह से मध्यवर्ग के पास अतिरिक्त खर्च करने लायक राशि नहीं बच रही। साथ ही ब्याज दरें इतनी ज्यादा हैं कि लोग बैंकों से कर्ज लेकर भी इन्हें नहीं खरीदना चाहते। यही वजह है कि पिछले त्योहारी सीजन में सरकार की तरफ से दोपहिया वाहनों व घरेलू उपकरणों की खरीद के लिए कर्ज दिलाने जो वित्तीय सहायता दी गई थी, बैंक उसका भी इस्तेमाल नहीं कर पा रहे। अप्रैल से दिसंबर, 2013 के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स उपभोक्ता सामान उद्योग में 16.2 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। इस उद्योग का पिछले कई वर्षो के दौरान यह सबसे खराब प्रदर्शन है।

एंजेल ब्रोकिंग ने बजट पर अपनी समीक्षा में कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण उद्योग पर उत्पाद शुल्क कटौती का कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। हां, अगर इस राहत को आगामी सामान्य बजट में भी बरकरार रखा जाता है तो फिर इसका ज्यादा सकारात्मक असर पड़ेगा। एक अनुमान के मुताबिक 10,000 रुपये के इलेक्ट्रॉनिक्स सामान की कीमत में दो सौ रुपये की कमी संभावित है, जबकि 50 हजार के उपकरणों की कीमत एक हजार रुपये तक घट सकती है। इन एजेंसियों का यह मानना है कि शुल्क कटौती का फायदा ऑटो कंपनियों को थोड़ा बहुत मिल सकता है। कई कंपनियों ने तो अपनी वाहनों की कीमतें भी घटा दी हैं। होंडा मोटरसाइकिल कंपनी ने अपनी बाइकों व स्कूटरों की कीमतें 1,600 रुपये से 7,600 रुपये तक कम की हैं। मारुति, हुंडई सहित तमाम बड़ी कार कंपनियों की तरफ से एक दो दिनों के भीतर नई कीमत का एलान होने के आसार हैं। लेकिन इनका असली फायदा तभी होगा जब महंगाई कम हो और ब्याज दरों में भी छूट मिले।

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