जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। कोरोनावायरस ने निपटने के लिए भारत में जो कदम उठाये जा रहे हैं उसका बहुत बड़ा आर्थिक खामिजाया भुगतने के लिए देश को तैयार रहना चाहिए। 21 दिनों के लिए समूचे देश में लॉकडाउन करने से अर्थव्यवस्था से जुड़े तकरीबन तीन चौथाई से भी ज्यादा हिस्से पर ताला लग जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रख्यात आर्थिक शोध एजेंसियों का कहना है कि इससे अगले वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर काफी नीचे सकती है। आइएनजी बैंक की रिसर्च रिपोर्ट ने तो यहां तक दावा किया है कि भारत की विकास दर अगले वित्त वर्ष के दौरान घट कर 0.5 फीसद तक आ सकती है।

गुरुवार को आईएनजी बैंक और नोमुरा सिक्यूरिटीज ने कोरोनावायरस की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर लाकडाउन करने के आर्थिक असर पर अपनी अपनी रिपोर्ट लांच की है। नोमुरा सिक्यूरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक 21 दिनों के लाकडाउन से भारतीय अर्थव्यवस्था की उत्पादकता में 4.5 फीसद की गिरावट आ सकती है। इसका असर लाकडाउन खत्म होने के बाद भी होगी। कंपनियों और बैंकिंग सेक्टर पर संकट और घनीभूत होगा। 77 फीसद आर्थिक गतिविधियों के ठप्प हो जाने से असंगठित सेक्टर में काम करने वालों की आमदनी पर सबसे ज्यादा असर होगा। निजी खपत में भारी कमी आ जाएगी और इसे 21 दिनों बाद भी पटरी पर लाना आसान नहीं होगा। सनद रहे कि पिछले दो वित्त वर्षों से देश की अर्थव्यवस्था में मंदी आने के लिए निजी खपत में भारी कमी आने को जिम्मेदार बताया जा रहा है। लाकडाउन की स्थिति देश के बैंकिंग सेक्टर के लिए भी बहुत ही विपरीत हालात पैदा करेगा। बैंकिंग सेक्टर पहले से संघर्ष कर रहा है और हाल ही में एक बड़े निजी बैंक को बचाने के लिए सरकार को काफी यतन करने पड़े हैं। ऐसे हालात में बैंकों के एनपीए में नए सिरे से तेजी देखने को मिल सकती है। राजकोषीय घाटा मौजूदा लक्ष्य 3.5 फीसद से बढ़ कर 4.7 फीसद तक जा सकता है। अगर सरकार की तरफ से आर्थिक पैकेजे देने की घोषणा की जाती है तो यह और ज्यादा हो सकता है।

इसी तरह से आइएनजी बैंक की रिपोर्ट बताती है कि लाकडाउन से खपत पर सबसे ज्यादा असर होगा। भारतीय जीडीपी की दिशा व दशा 57 फीसद खपत से तय होती है। 21 दिनों का लाकडाउन अगली तिमाही में आर्थिक विकास दर की रफ्तार को काफी घटा सकती है। इसका असर कम से कम दो तिमाहियों पर सबसे ज्यादा होगा। आइएनजी बैंक ने वर्ष 2019-20 के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर 4 फीसद रहने का अनुमान लगाया है। लेकिन कोविड-19 कोरोनावायरस के इम्पैक्ट की वजह से अगले वित्त वर्ष के लिए विकास दर अनुमान को घटा कर महज 0.5 फीसद कर दिया है जबकि पहले इसके 4.8 फीसद रहने का अनुमान लगाया था। आईएनजी ने कहा है कि जो स्थिति बन रही है वह 6 फीसद विकास दर हासिल करने की सरकार की कोशिशों से बहुत ही दूर है और आने वाले दिनों में कई स्तरों पर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश करनी होगी।

 

Posted By: Nitesh

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