नई दिल्ली, पीटीआइ। देश की दूसरी सबसे बड़ी आइटी कंपनी इन्फोसिस ने कहा है कि व्हिसलब्लोअर्स मामले में प्राथमिक जांच के दौरान कोई साक्ष्य नहीं पाया गया है। इस मामले में कंपनी के अज्ञात कर्मचारियों ने इसके शीर्ष अधिकारियों पर गलत व्यापारिक नीतियों को अपनाने का आरोप लगाया था। इन्फोसिस ने बताया कि स्वतंत्र आंतरिक ऑडिट के दौरान व्हिसलब्लोअर्स की शिकायत के आधार पर जांच की गई। लेकिन जांच में प्राथमिक तौर पर किसी तरह के साक्ष्य नहीं मिले हैं।

फिलहाल, मामले की जांच अभी जारी है। इसके साथ ही कंपनी ने कहा है कि वह जांच की प्रगति रिपोर्ट शेयर बाजारों को नियमित रूप से देती रहेगी। कंपनी के ओर से दी गई इस सूचना का असर उसके शेयरों पर दिखाई दिया। सोमवार को इसके शेयरों में 3.23 परसेंट का उछाल दर्ज किया गया।

इससे पहले एनएसई ने 24 अक्टूबर को इन्फोसिस से इस मामले की जानकारी नहीं देने पर सफाई मांगी थी। इसके जवाब में कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया था कि उसकी ऑडिट कमेटी और कानूनी सलाहकार कंपनी शादरूल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी इस मामले की जांच कर रही है। इसके साथ ही कंपनी ने कहा था कि वह इस मामले की स्वतंत्र आंतरिक ऑडिट के लिए अर्नेस्ट एंड यंग के साथ मशविरा कर रही है।

गौरतलब है कि कंपनी के कुछ गुमनाम शिकायतकर्ता कर्मचारियों ने शीर्ष प्रबंधन पर वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि वित्तीय नतीजों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के लिए शीर्ष प्रबंधन ने कई ऐसे तरीके अपनाए, जो नैतिक मूल्यों के खिलाफ थे। आरोप इतने गंभीर थे कि पूंजी बाजार नियामक सेबी, शेयर बाजारों और अमेरिका के पूंजी बाजार नियामक ने भी कंपनी के खिलाफ जांच शुरू कर दी। पिछले महीने सामने आई इस खबर के बाद कंपनी के शेयर धड़ाम हो गए थे।

पिछले महीने मिले थे पत्र

कंपनी के बोर्ड मेंबर्स ने 30 सितंबर को दो शिकायती पत्र प्राप्त किए थे। इन पत्रों में अनुचित गतिविधियों की शिकायत की गई थी। इन्हें 10 अक्टूबर को कंपनी की ऑडिट कमेटी के सामने पेश किया गया और इसके अगले दिन इस बारे में कंपनी के नॉन एक्जीक्यूटिव सदस्यों को भी अवगत कराया गया। शिकायत पत्र में आरोपितों के ई-मेल और वॉइस रिकॉर्डिग मौजूद होने की बात कही गई है।

Posted By: Pawan Jayaswal

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