नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। खुदरा महंगाई में उम्मीद के मुताबिक आई गिरावट के बाद ब्याज दरों में कटौती की संभावना मजूबत हो गई है।

जनवरी में महंगाई दर घटकर 2.05 फीसद हो चुकी है, जो जून 2017 के बाद सबसे कम है। महंगाई में आई गिरावट की वजह खाने पीने के सामान की कीमतों में आई कमी और ईंधन के दाम में मामूली बढ़ोतरी का होना है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की अगली समीक्षा बैठक अप्रैल महीने में होनी हैं, और माना जा रहा है कि इस बैठक में केंद्रीय बैंक एक बार फिर से ब्याज दरों में कटौती की राहत दे सकता है।

इससे पहले आए रॉयटर्स के पोल में अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने इस बात की उम्मीद जताई थी कि आम चुनाव से पहले होने वाली बैठक में ब्याज दरों को घटाया जा सकता है।

पोल के मुताबिक 54 अर्थशास्त्रियों में से 30 ने माना कि अगली बैठक में आरबीआई फिर से रेट में कटौती कर सकता है।

गौरतलब है कि हालिया बैठक में आरबीआई ने अप्रत्याशित रूप से रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती की घोषणा करते हुए इसे 6.50 फीसदी से घटाकर 6.25 फीसद कर दिया है।

गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में हुई समीक्षा बैठक में मौद्रिक रुख को ''सख्त'' से बदलकर ''सामान्य/न्यूट्रल'' कर दिया गया था। नीतिगत रुख में बदलाव किए जाने के बाद माना जा रहा था कि आरबीआई आगे भी ब्याज दरों में कटौती की राहत दे सकता है।

गौरतलब है कि आरबीआई ने महंगाई के लिए 4 फीसद (+- दो फीसद) का लक्ष्य रखा है। ईंधन की कीमतों में गिरावट से देश की खुदरा महंगाई दर दिसंबर में घटकर 2.19 फीसद हो गई। नवंबर में यह 2.33 फीसद थी। पिछले कुछ महीनों में महंगाई दर आरबीई के तय लक्ष्य से काफी नीचे रही है।

ब्याज दरों को तय करने वक्त आरबीआई खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है। महंगाई में आई कमी और अर्थव्यवस्था में सुस्ती को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बड़ी राहत देते हुए ब्याज दरों में कटौती की है।

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Posted By: Abhishek Parashar

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