स्वच्छ हवा के लिए एकजुट हुई इंडस्ट्री: 'नेक्स्ट जेन भारत 2026' में GAIL India, ITC होटल्स और दिग्गजों ने साझा किए समाधान
‘नेक्स्ट जेन भारत 2026’ सम्मेलन में GAIL India और ITC होटल्स सहित कई इंडस्ट्री लीडर्स ने भारत में स्वच्छ हवा के लिए व्यावहारिक समाधानों पर जोर दिया।

स्वच्छ हवा के लिए एकजुट हुई इंडस्ट्री
HighLights
GAIL ने स्वच्छ ऊर्जा के विविध स्रोतों पर जोर दिया।
ITC होटल्स ने सस्टेनेबल ग्रोथ के लिए तकनीक अपनाई।
इंडस्ट्री लीडर्स ने स्वच्छ हवा के लिए समाधान सुझाए।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: 'नेक्स्ट जेन भारत 2026 – ए क्लीन एयर कॉन्फ्रेंस' में GAIL India और ITC होटल्स सहित कई इंडस्ट्री लीडर्स ने भारत में स्वच्छ हवा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यावहारिक और तकनीकी समाधानों पर खास जोर दिया। इस दौरान GAIL के अलग-अलग तरह के 'एनर्जी मिक्स' (ऊर्जा के विविध स्रोतों) से लेकर ITC होटल्स की एनर्जी एफिशिएंसी से जुड़ी बेहतरीन पहलों पर चर्चा की गई।
GAIL गैस लिमिटेड के कम्युनिकेशन हेड (चीफ मैनेजर) सैकत चक्रवर्ती ने इस बात पर जोर दिया कि स्वच्छ ऊर्जा की तरफ बदलाव रातों-रात नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार नेचुरल गैस, बायोगैस, रिन्यूएबल्स और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे कई ऊर्जा स्रोतों को अपनाने पर जोर दे रही है। चक्रवर्ती के मुताबिक, जैसे-जैसे भारत का क्लीन-एनर्जी इकोसिस्टम बढ़ेगा, व्यवसायों को इन सभी स्रोतों के साथ मिलकर काम करना होगा। यह कार्यक्रम मॉर्निंग स्प्राउट कंसल्टिंग और दिल्ली यूनिवर्सिटी के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज द्वारा आयोजित किया गया था।
ITC होटल्स लिमिटेड के टेक्निकल सर्विसेज हेड, राहुल प्रभाकर ने बताया कि उनकी कंपनी सस्टेनेबल ग्रोथ के लिए टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को सबसे बड़ा मददगार मानती है। उन्होंने इलेक्ट्रिक बॉयलर के इस्तेमाल का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे एनर्जी की क्षमता बेहतर हुई है और स्टीम बनाने से होने वाले कार्बन फुटप्रिंट में भी कमी आई है। प्रभाकर ने यह भी बताया कि बेंगलुरु का ITC विंडसर दुनिया का पहला ऐसा होटल बन गया है, जिसे U.S. ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (USGBC) की तरफ से 'LEED जीरो कार्बन सर्टिफिकेशन' मिला है।
मॉर्निंग स्प्राउट कंसल्टिंग की फ़ाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर श्वेता ठाकुर नंदा ने कहा, "जब इंडस्ट्री अपनी भूमिका को स्वीकार करेगी और नए रास्ते अपनाएगी, तो साफ हवा के लिए सामूहिक प्रयास होंगे। जैसे-जैसे बिज़नेस नए तरीके अपनाएंगे और ज़्यादा सस्टेनेबल तौर-तरीके अपनाएंगे, हम आर्थिक तरक्की और पर्यावरण की बेहतरी के बीच संतुलन बनाते हुए भारत की विकास दर को बढ़ा सकते हैं।"
धेमात्रा एक्सप्रेस लॉजिस्टिक्स के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेंद्र शर्मा ने बताया कि चुनौती सिर्फ मौजूदा सिस्टम को बंद करना नहीं, बल्कि कमियों को सुधारना है। उन्होंने फ्लीट मैनेजमेंट में टेक्नोलॉजी के उपयोग का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी कंपनी 25-30 टन वजन के लिए बड़े ट्रकों और शहरों के अंदर छोटे वाहनों का इस्तेमाल कर रही है, ताकि काम बेहतर हो और पर्यावरण पर असर कम पड़े।
इकाया अर्थ के शिवम चौहान के मुताबिक, उत्सर्जन को उसके स्रोत पर ही कम करने के साथ-साथ, वातावरण में पहले से मौजूद कार्बन को हटाने वाली टेक्नोलॉजी में निवेश करना भी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण से असरदार ढंग से निपटने के लिए इन दोनों तरीकों को अपनाना होगा।
MeVachi Solutions के फाउंडर चिराग कटारिया ने घर के अंदर की हवा (इनडोर एयर क्वालिटी) पर ध्यान दिलाते हुए आसान तरीके सुझाए। उन्होंने सलाह दी कि दोपहर में जब बाहर की हवा साफ होती है, तब घरों में वेंटिलेशन करना चाहिए, जबकि रात में जब प्रदूषण का स्तर अधिक हो तब वेंटिलेशन कम कर देना चाहिए।
इसके साथ ही GreenQurve की फाउंडर और CEO स्वाति जैन ने कहा कि युवाओं की अहम भूमिका है और रोजमर्रा के उनके फैसले बहुत असरदार साबित होंगे। उन्होंने बताया,"जब युवा ऐसे प्रोडक्ट और तौर-तरीके चुनते हैं जो पर्यावरण के लिए बेहतर हों, तो उनके इन फैसलों का असर परिवारों, समुदायों और पूरे समाज पर पड़ सकता है।"
