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US Trade Deal पर भारत का सख्त रुख, पीयूष गोयल ने सुनाई खरी-खोटी; बोले- 'डील तभी होगी जब...'

Published: Thu, 25 Jun 2026 05:56 PM (GMT+05:30)

India US Trade Deal: भारत ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर सख्त रुख अपनाया है, जिसमें केंद्रीय मंत्री ...और पढ़ें

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भारत का कड़ा रुख पीयूष गोयल ने रखी शर्त

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भारत का कड़ा रुख पीयूष गोयल ने रखी शर्त

HighLights

  1. भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में।

  2. पीयूष गोयल ने टैरिफ लाभ की शर्त रखी।

  3. भारतीय निर्यातकों के हितों को प्राथमिकता।

नई दिल्ली| भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर जल्दबाजी में समझौता नहीं करेगा। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि, "जब तक भारतीय निर्यातकों को दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले तुलनात्मक टैरिफ लाभ (Comparative Tariff Advantage) देने वाला ढांचा तैयार नहीं हो जाता, तब तक भारत अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर हस्ताक्षर नहीं करेगा।"

6 फरवरी को बन चुकी थी सहमति

पीयूष गोयल ने कहा कि,

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते (India US Trade Deal) के व्यापक बिंदुओं पर 6 फरवरी को सहमति बन चुकी थी। इसके बाद से दोनों देशों की टीमें समझौते की बारीकियों पर लगातार काम कर रही हैं। भारत और अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं, लेकिन भारत अपने व्यापारिक हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।"

डील में सबसे जरूरी मुद्दा क्या है?

पीयूष गोयल के मुताबिक, मौजूदा बातचीत का सबसे अहम मुद्दा यह है कि भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ स्थिति कैसे मिले। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसे कानूनी और नीतिगत विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिनके जरिए भारत को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दी जा सके।

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क्या है भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता?

सरकार का मानना है कि यदि भारतीय निर्यातकों को पर्याप्त टैरिफ लाभ नहीं मिला तो व्यापार समझौते का अपेक्षित फायदा नहीं होगा। इसलिए भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी डील का सीधा लाभ देश के उद्योगों, निर्यातकों और रोजगार सृजन पर दिखाई दे।

पीयूष गोयल के बयान से साफ है कि भारत अब केवल समझौते के लिए समझौता करने के बजाय अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है। ऐसे में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अंतिम मुहर तभी लगेगी, जब भारतीय निर्यातकों के लिए स्पष्ट और ठोस प्रतिस्पर्धात्मक लाभ सुनिश्चित हो जाएगा।