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सितंबर में भारत ने रूस से हर दिन मंगाया 18 लाख बैरल कच्चा तेल, ईराक और सऊदी से बढ़ा आयात

By Jagran BusinessEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Thu, 24 Sep 2026 08:17 PM (IST)Updated: Thu, 24 Sep 2026 08:30 PM (IST)

भारत ने सितंबर में रूस से लगभग 18 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया, जो अगस्त के स्तर के करीब है लेकिन जुलाई से कम है।

सितंबर में भारत का रूसी तेल आयात 18 लाख बैरल प्रतिदिन रहा।

सितंबर में भारत का रूसी तेल आयात 18 लाख बैरल प्रतिदिन रहा।

HighLights

  1. सितंबर में भारत का रूसी तेल आयात 18 लाख बैरल प्रतिदिन रहा।

  2. इराक और सऊदी अरब से कच्चे तेल का आयात सितंबर में बढ़ा।

  3. रिफाइनरी रखरखाव और चीन की खरीद से रूसी आपूर्ति प्रभावित।

एजेंसी, नई दिल्ली। भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात सितंबर में करीब 18 लाख बैरल प्रतिदिन (India Crude Import From Russia) रहा, जो अगस्त की तुलना में काफी हद तक स्थिर है लेकिन जुलाई के स्तर से कम है। रिफाइनरी के रखरखाव और चीन की ओर से रूसी तेल की अधिक खरीद के कारण भारत को रूसी तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई।

वैश्विक जिंस डेटा एवं विश्लेषण कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने अगस्त में करीब 20.8 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चे तेल का आयात किया था। इसके पहले जुलाई में यह आयात 28.2 लाख बैरल प्रतिदिन रहा था।

ईराक और सऊदी से बढ़ा आयात

रूसी तेल की आपूर्ति में कमी की भरपाई मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के देशों ने की। इराक से सितंबर में भारत को करीब 5.05 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल की आपूर्ति हुई, जो अगस्त में 1.63 लाख बैरल प्रतिदिन थी।

सऊदी अरब से आपूर्ति भी बढ़कर 5.76 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई, जो अगस्त में 3.47 लाख बैरल प्रतिदिन थी। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से सितंबर में करीब 5.22 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल की आपूर्ति हुई, जो अगस्त के 5.46 लाख बैरल प्रतिदिन के लगभग बराबर है।

क्या बोले विश्लेषक?

केप्लर के प्रमुख विश्लेषक (रिफाइनिंग) निखिल दुबे ने कहा कि अगस्त में रूसी तेल के आयात में कमी का एक कारण रूस से निर्यात में गिरावट भी थी। यह गिरावट निर्यात बुनियादी ढांचे में आई बाधाओं के कारण हुई थी।

निखिल दुबे ने कहा कि भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद में बड़ी कमी किए जाने पर एशिया और अन्य क्षेत्रों के रिफाइनरी कंपनियों के बीच वैकल्पिक आपूर्ति के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय मूल्य-अंतर पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत तकनीकी रूप से रूसी कच्चे तेल की जगह अन्य स्रोतों से तेल ले सकता है, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त लागत आएगी।

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