नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में फरवरी महीने के दौरान सुस्त रफ्तार देखने को मिली क्योंकि कारखाना उत्पादन और नए बिजनेस ऑर्डर में धीमी ग्रोथ देखने को मिली। एक मासिक सर्वे में यह जानकारी सामने आई है।

निक्केई इंडिया का मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर इंडेक्स (पीएमआई) फरवरी में गिरकर 52.1 पर रहा जो कि जनवरी महीने के दौरान 52.4 रहा था। यह ऑपरेटिंग परिस्थितियों में मामूली सुधार को दर्शाता है। यह लगातार सातवां महीना है जब मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 50 के स्तर से ऊपर बना हुआ है। आपको बता दें कि पीएमआई में 50 के ऊपर का स्तर विस्तार और इसके नीचे का स्तर संकुचन को दर्शाता है।

मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई में यह विस्तार मुख्य रूप से विनिर्माण उत्पादन में एक महत्वपूर्ण वृद्धि से प्रेरित था, जबकि कुछ ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई थीं जो कि अंतर्निहित मांगें थीं जो कि घरेलू और बाहरी स्रोतों के साथ नए व्यावसायिक लाभों को बढ़ा रही थीं।

आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री और इस रिपोर्ट की लेखिका आशना डोढिया ने बताया, “यह कहा गया था कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ग्रोथ के रास्ते पर रहेगा, क्योंकि जुलाई में लागू हुए वस्तु एवं सेवा कर का प्रभाव खत्म हो गया है।”

अधिक उत्पादन आवश्यकताओं के जवाब में उन्होंने कहा कि फर्मों ने फरवरी के दौरान अपना स्टाफिंग स्तर बढ़ाया। हालांकि फरवरी महीने मे रोजगार सृजन की की गति जनवरी से थोड़ा तेज थी। कीमत के मोर्चे पर सर्वेक्षण में कहा गया है कि फरवरी 2017 के बाद से मुद्रास्फीति तेज हो गई है।

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