देश का राजकोषीय घाटा बढ़ा, अप्रैल-अगस्त में 7.10 लाख करोड़ पर पहुंचा; सब्सिडी के खर्च और Capex ने बढ़ाया बोझ
भारत सरकार का राजकोषीय घाटा अगस्त 2026 के अंत तक पूरे साल के बजट अनुमान का लगभग 42% हो गया है, जो अप्रैल-अगस्त में 7.10 लाख करोड़ रुपये रहा।

HighLights
राजकोषीय घाटा अगस्त 2026 तक बजट अनुमान के 42% पर पहुंचा।
अप्रैल-अगस्त में घाटा 7.10 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
बढ़ी हुई सब्सिडी और पूंजीगत व्यय मुख्य कारण रहे।
नई दिल्ली। भारत सरकार का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बढ़ गया है। अगस्त 2026 के आखिर में केंद्र का राजकोषीय घाटा पूरे साल के बजट अनुमान का लगभग 42 प्रतिशत हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 38 प्रतिशत था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बड़ी सब्सिडी पर खर्च में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई और सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर की रफ़्तार बनाए रखी। अप्रैल-अगस्त के दौरान राजकोषीय घाटा 7.10 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि 2026-27 के लिए पूरे साल का लक्ष्य 16.96 लाख करोड़ रुपये है। पिछले साल इसी समय यह घाटा पूरे साल के बजट अनुमान का 38 प्रतिशत था।
घाटे का ज़्यादा इस्तेमाल इसलिए हुआ क्योंकि सरकार का मुख्य सब्सिडी पर खर्च पिछले साल की इसी अवधि के 1.50 लाख करोड़ रुपये से 24.4 प्रतिशत बढ़कर 1.87 लाख करोड़ रुपये हो गया।
कैसे बढ़ा राजकोषीय घाटा?
पूरे साल के लिए बजट में तय 4.11 लाख करोड़ रुपये में से सब्सिडी पर खर्च पहले ही 46 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह बजट अनुमान का 39 प्रतिशत था। इस बढ़ोतरी में मुख्य रूप से खाद्य और यूरिया सब्सिडी का योगदान रहा।
अप्रैल-अगस्त के दौरान फ़ूड सब्सिडी पर होने वाला खर्च लगभग 30% बढ़कर ₹83,510 करोड़ हो गया, जबकि एक साल पहले यह ₹64,408 करोड़ था। यह पूरे साल के लिए तय ₹2.28 लाख करोड़ के बजट का 37% था, जबकि पिछले साल इसी समय यह बजट अनुमान का 32% था।
यूरिया सब्सिडी पर खर्च सालाना आधार पर 27.9% बढ़कर ₹60,622 करोड़ से ₹77,522 करोड़ हो गया है। सरकार ने 2026-27 में यूरिया सब्सिडी के लिए तय ₹1.17 लाख करोड़ में से पहले ही 66% खर्च कर दिया है; यह पिछले साल इसी अवधि में हुए 51% खर्च के मुकाबले काफी ज़्यादा है।
कैपेक्स जारी रखेगी सरकार
घाटे में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत खर्च) बढ़ाने पर लगातार ज़ोर दे रही है। पिछले साल इसी अवधि में कैपिटल एक्सपेंडिचर पूरे साल के लक्ष्य का 39 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 42 प्रतिशत हो गया है।
बाज़ार से लिए गए कर्ज़ का हिस्सा सबसे ज़्यादा रहा, जो ₹5.30 लाख करोड़ था। यह 2026-27 के लिए बजट में तय ₹13.03 लाख करोड़ का 41 प्रतिशत है। पिछले साल इसी अवधि में, बाज़ार से लिया गया कर्ज़ सालाना अनुमान का 37 प्रतिशत था।
