कभी पुर्जे-पुर्जे के लिए विदेशों पर निर्भर था भारत, आज चीन को बेच रहा 9.61 अरब डॉलर के इलेक्टॉनिक्स उत्पाद
भारत का चीन को निर्यात अप्रैल-अगस्त की अवधि में लगभग 40% बढ़कर 9.61 अरब डॉलर हो गया है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान प्रमुख योगदानकर्ता रहे।
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चीन को भारते निर्यात में 40% की बढ़ोतरी
HighLights
चीन को भारत का निर्यात 40% बढ़कर 9.61 अरब डॉलर हुआ।
इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान निर्यात वृद्धि के प्रमुख कारक।
AI और डेटा सेंटर की मांग से इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बढ़ा।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत इन दिनों दुनियाभर में अपने व्यापारिक रिश्ते मजबूत कर रहा है। करीब 40 देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने के बाद अपने पड़ोसियों से भी बिजनेस बढ़ा रहा है। ब्लूमबर्ग न्यूज की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक अगस्त तक के पांच महीनों में चीन को भारत का निर्यात लगभग 40% बढ़ा है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान प्रमुख फैक्टर बनकर उभरे हैं।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब भारतीय मैन्युफैक्चरर्स ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं नई दिल्ली और बीजिंग उन संबंधों को सुधारने में लगे हैं जो हाल के वर्षों में काफी बिगड़ रहे थे। साथ ही यह बदलाव अंतर्राष्ट्रीय व्यापार परिस्थितियों में आए परिवर्तनों के बीच भी हो रहा है, जिनमें अमेरिका की टैरिफ नीतियां शामिल हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स शिपमेंट में आई तेजी
एक्सपोर्ट में हालिया बढ़ोतरी में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का बड़ा योगदान रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-अगस्त अवधि में चीन को भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 15% से अधिक की वृद्धि हुई। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटरों के ग्लोबल एक्सपेंशन से जुड़ी मांग इस बढ़ोतरी में योगदान दे रही है।
इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव राजू गोयल ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि, “चीन को निर्यात में यह उछाल आंशिक रूप से उन सप्लायर्स पर बढ़े दबाव के कारण है, जिन्हें AI से जुड़े उत्पादों के लिए जरूरी हाई-एंड उपकरणों की मांग पूरी करनी है और साथ ही डेटा सेंटरों की संख्या बढ़ रही है। इससे भारत से चीन को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को बढ़ावा मिला है।”
यह बढ़ोतरी पिछले फाइनेंशियल ईयर में इलेक्ट्रॉनिक्स शिपमेंट में आई तेज बढ़ोतरी के बाद दर्ज की गई है। मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में चीन को भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात तीन गुना बढ़कर 3.18 अरब डॉलर हो गया था। इसमें प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली, स्मार्टफोन, डिस्प्ले मॉड्यूल और दूरसंचार उपकरण प्रमुख उत्पाद रहे।
इंजीनियरिंग सामान में भी बढ़ोतरी
निर्यात में वृद्धि केवल इलेक्ट्रॉनिक्स तक सीमित नहीं रही। निर्यातकों के अनुसार, अप्रैल-अगस्त की अवधि में चीन को इंजीनियरिंग सामान का निर्यात भी पिछले साल की तुलना में लगभग 21% बढ़ा। इसमें मशीनरी और उसके पुर्जे, ऑटो कंपोनेंट्स और हैंड टूल्स शामिल हैं।
इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने मीडिया को बताया कि यह बढ़ोतरी दिखाती है कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग ग्लोबल वैल्यू चेन्स में विश्वसनीयता हासिल कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि, “यह दर्शाता है कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर दुनिया की सबसे प्रतिस्पर्धी वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में से एक में अपनी विश्वसनीयता स्थापित करना शुरू कर चुका है।”
कोरोना स्टील इंडस्ट्री के MD अरुण कुमार गरोड़िया ने कहा कि निर्यात में यह बढ़ोतरी, भले ही अभी अपेक्षाकृत छोटी है, लेकिन यह संकेत देती है कि मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल में चीन भारतीय उत्पादों के प्रति अधिक ग्रहणशील हो सकता है।
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क्या कहते हैं मंत्रालय के आंकड़े?
अप्रैल-अगस्त तक में चीन को भारत के निर्यात में व्यापक स्तर पर भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वस्तु निर्यात 38.71% बढ़कर 9.61 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 6.93 अरब डॉलर था। मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि चीन को निर्यात वृद्धि में इंजीनियरिंग सामान का योगदान 20.73% रहा, इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक सामान (15.4%), पेट्रोलियम उत्पाद (13.55%), ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिकल्स (10.53%) वहीं लौह अयस्क (9.97%) का स्थान रहा।
