नई दिल्ली। वर्ष 2030 तक भारत दुनिया की तीसरी और चीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। ऊर्जा क्षेत्र की ग्लोबल कंपनी बीपी ने यह अनुमान लगाया है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि की गई है।

बीपी के मुख्य अर्थशास्त्री क्रिस्टॉफ रुहल ने कहा कि आबादी, सकल घरेलू उत्पाद [जीडीपी] और ऊर्जा मांग के मामले में दुनिया में भारत और चीन की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत की होगी। रिपोर्ट के अनुसार भारत में ऊर्जा की मांग में विशेष इजाफा नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि भारत की औद्योगिक क्षेत्र की मांग घटकर 4.5 प्रतिशत सालाना रह जाएगी।

देश 40 फीसदी कोयले की जरूरत आयात से पूरी करेगा। भारत ऊर्जा की खपत 18 साल बाद आज की तारीख में चीन की खपत से आधी होगी। वहीं, ऊर्जा खपत के मामले में भारत निचले स्तर पर होगा। चीन के विशेषज्ञों के सहयोग से विश्व बैंक की तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन विकास के 'निर्णायक मोड़' पर है। यदि वह ढांचागत सुधार करता है तो 2030 से पहले ही विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

चीन में विकास के उप मंत्री लियू शिजिन ने कहा कि वर्ष 2035 तक चीन की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 5-6 प्रतिशत रह जाएगी। पिछले तीन दशक से उसकी रफ्तार लगातार दहाई अंक में रही है। चीन की जीडीपी वृद्धि दर अगले कुछ साल में घट कर 5 प्रतिशत रह जाने की उम्मीद है।

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