नई दिल्ली (पीटीआई)। जीएसटी, नोटबंदी और एनपीए समस्या के चलते अल्प अवधि में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि का अनुमान लगाना बहुत मुश्किल काम है। भारतीय अर्थव्यवस्था को इससे उबरने में अभी दो और साल का वक्त लग सकता है और इसी अवधि में भारत को 7.5 फीसद की वृद्धि का लक्ष्य रखना चाहिए। यह बात पूर्व भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) गवर्नर वाई वी रेड्डी ने कही है।

रेड्डी ने कहा, “यह एक एक झटका है जिसकी नकारात्मक धारणा के साथ शुरुआत हुई है। इसमें कुछ सुधार आ सकता है और उसके बाद कुछ फायदा मिल सकता है। फिलहाल इस समय इसमें परेशानी है और लाभ बाद में आयेगा। कितना फायदा होगा और कितने अंतराल के बाद यह होगा यह देखने की बात है। मेरा अनुमान है कि इसमें कुछ साल लग सकते हैं। कुछ साल में हम फिर से 7.5- 8 प्रतिशत वृद्धि पर पहुंचने का लक्ष्य लेकर चल सकते हैं। झटके से जो परेशानी खड़ी हुई थी वह कम हो रही है जबकि सकारात्मक माहौल अभी आना बाकी है। मेरी उम्मीद है कि यह माहौल आयेगा।”

रेड्डी ने आगे कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को लगातार तीन साल तक एक प्रकार का सकारात्मक झटका कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के रूप में मिला है। लगातार तीन साल तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम आश्चर्यजनक रूप से नीचे रहे। उन्होंने याद किया कि जब वह गवर्नर थे उसके मुकाबले पिछले तीन साल में कच्चे तेल के दाम एक तिहाई पर आ गये थे।

Posted By: Praveen Dwivedi

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