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LTCG टैक्स खत्म, ₹2.6 लाख करोड़ की बिकवाली के बाद सरकार ने FIIs को दी राहत; भारत लौटेंगे विदेशी निवेशक?

Published: Fri, 05 Jun 2026 12:27 PM (IST)Updated: Fri, 05 Jun 2026 12:39 PM (IST)

सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों के सरकारी प्रतिभूतियों में किए गए निवेश पर LTCG टैक्स खत्म कर दिया है। यह ...और पढ़ें

FII के लिए LTCG को समाप्त कर दिया गया है।

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संक्षेप में पढ़ें

नई दिल्ली। सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) में किए गए निवेश पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (LTCG) को समाप्त करने का फैसला किया है। इस संबंध में शुक्रवार को एक अध्यादेश जारी किया गया। इसका मकसद देश में डॉलर के प्रवाह को बढ़ाना है। इस अध्यादेश के जरिये आयकर अधिनियम में संशोधन कर यह छूट प्रदान की गई है।

सरकार ने दीर्घकालिक एवं स्थिर पूंजी आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों पर पूंजीगत लाभ कर हटाने का फैसला किया है, क्योंकि इन माध्यमों की अवधि लंबी होती है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब विदेशी निवेशकों ने इस वर्ष अब तक स्थानीय शेयर बाजार से भारी 2.6 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है, जो 2025 में निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपये से कहीं अधिक है। इसकी वजह वैश्विक अनिश्चितता रही है। केवल जून के पहले तीन दिन में ही विदेशी निवेशकों ने शेयरों से करीब 34,000 करोड़ रुपये निकाले, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।

17,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश

विदेशी निवेशकों ने हालांकि पूर्ण पहुंच मार्ग (एफएआर) के तहत लोन मार्केट में 17,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। वहीं इस वर्ष अब तक उन्होंने सामान्य ऋण सीमा के तहत करीब 4,000 करोड़ रुपये और स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) के जरिये 340 करोड़ रुपये की निकासी की है। एफआईआई को इक्विटी और ऋण निवेश से होने वाले लाभ पर वर्तमान में 12.5 प्रतिशत की दर से दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर देना पड़ता है। 

बजट में बढ़ा था टैक्स

जुलाई, 2024 में पेश किए गए केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अधिकतर परिसंपत्तियों पर एलटीसीजी कर दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दी थी। वहीं भारत में लिस्टेड शेयर पर अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर (STCG) आयकर अधिनियम की धारा-111 ए के तहत 15 प्रतिशत है।

रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिरने के बाद अधिकारियों ने इसे संभालने के प्रयास तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की आयात लागत बढ़ने के बीच लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने की पिछले महीने अपील की थी। घरेलू मुद्रा कई कारणों से कमजोर हो रही है, जिनमें अमेरिकी व्यापार शुल्क, विदेशी पूंजी की रिकॉर्ड निकासी और बढ़ता आयात बिल शामिल हैं, जो देश की वित्तीय स्थिति पर दबाव डाल रहे हैं।

रुपया डॉलर के मुकाबले 96.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा 

भारतीय रिजर्व बैंक आमतौर पर डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करता है। रुपया 20 मई, 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। कभी एशिया की अपेक्षाकृत स्थिर मुद्राओं में गिना जाने वाला रुपया इस वर्ष अब सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली उभरती बाजार की मुद्राओं में से एक बन गया है। इस पर महंगे तेल, पूंजी निकासी, बढ़ते व्यापार घाटे और मजबूत अमेरिकी डॉलर का दबाव है। रुपया 2026 में अब तक करीब सात प्रतिशत टूटा है और 28 फरवरी को ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से इसमें लगभग छह प्रतिशत की गिरावट आई है। रुपया कैलेंडर वर्ष के पहले दिन डॉलर के मुकाबले 89.94 पर खुला था और 89.98 पर बंद हुआ था।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 22 मई को समाप्त सप्ताह में 7.51 अरब डॉलर घटकर 681.38 अरब डॉलर रह गया। इस वर्ष 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में यह भंडार 728.49 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा था, लेकिन पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद कई सप्ताह तक इसमें गिरावट आई क्योंकि रुपये पर दबाव बढ़ा और भारतीय रिजर्व बैंक को डॉलर बेचकर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा। देश का विदेशी मुद्रा भंडार दो जनवरी, 2026 को समाप्त सप्ताह में 686.801 अरब डॉलर था।

भारतीय रिजर्व बैंक ने अलग से कुछ दीर्घावधि सॉवरेन बॉन्ड को पूरी तरह सुलभ श्रेणी में शामिल करने की अनुमति दी है, जिससे विदेशी निवेशक बिना किसी सीमा के उनमें निवेश कर सकेंगे। इस मार्ग के तहत उपलब्ध सरकारी प्रतिभूतियों की सूची में पिछला संशोधन 2024 में किया गया था जब केंद्रीय बैंक ने 14 वर्ष और 30 वर्ष के बॉन्ड को हटा दिया था।

FIIs को LTCG टैक्स छूट पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एफपीआई लोन निवेशों को पूंजीगत लाभ कर (LTCG) से छूट देने से बॉन्ड फ्लो में तत्काल, अल्पकालिक बढ़ोतरी होगी और रुपया स्थिर रहेगा। जी-सेक में उदार एफपीआई सीमाएं तथा एक्सटर्नल कॉमर्शियल बोरोजिंग (ईसीबी) पर कम हेजिंग लागत के साथ, विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने में मदद मिलेगी। एनआरआई, ओसीआई और अन्य विदेशी व्यक्तियों के लिए निवेश नियमों को उदार बनाना, बाहरी वित्तीय स्थितियों के गतिशील रहने के समय भारत के पूंजी खाते को मजबूत करेगा तथा रुपया स्थिरता को भी समर्थन देगा। -धीरज रेल्ली, एमडी एवं सीईओ, एचडीएफसी सिक्योरिटीज


पिछले दो वर्षों में भारी घरेलू लोन और मजबूत बैंकिंग लोन डिमांड के कारण नीति संचरण कॉर्पोरेट उधार लागत में कमी लाने में असफल रहा। ईसीबी शर्तों को बेहतर बनाकर पीएसयू और बड़े निगमों को विदेशी बाजारों में जाने के लिए प्रोत्साहित करके, आरबीआई घरेलू आपूर्ति दबाव को कम कर रहा है और स्वाभाविक रूप से यील्ड को नीचे खींच रहा है। जी-सेक यील्ड में लगभग 4 आधार अंक की नरमी आई, जो संप्रभु मांग की स्थिरता दिखाती है।

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