मुंबई, पीटीआइ। घरेलू रेटिंग एजेंसी India Ratings and Research ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को संशोधित कर (-) 11.8 फीसद पर कर दिया है। इससे पहले उसने (-) 5.3 फीसद की जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया था। हालांकि, एजेंसी का अनुमान है कि देश की जीडीपी वित्त वर्ष 2020-21 के कमजोर आधार की वजह से वित्त वर्ष 2021-22 में रिबाउंड करेगी और उसमें 9.9 फीसद की तेजी देखने को मिल सकती है।  

रेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, ''वित्त वर्ष 2020-21 में 11.8 फीसद की निगेटिव ग्रोथ से जुड़ा इंडिया रेटिंग्स का अनुमान भारतीय इतिहास (वित्त वर्ष 1950-51 से जीडीपी डेटा उपलब्ध है) में सबसे कमजोर वृद्धि दर को दिखाता है। साथ ही यह छठी बार आर्थिक संकुचन को दिखाता है। इससे पहले वित्त वर्ष 1957-58, वित्त वर्ष 1965-66, 1966-67, वित्त वर्ष 1972-73 और वित्त वर्ष 1979-80 में जीडीपी में संकुचन देखने को मिला था।'' 

इससे पहले वित्त वर्ष 1979-80 में जीडीपी (-) 5.2 फीसद पर रही थी।  

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एजेंसी ने वित्त वर्ष 2020-21 में 18.44 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक घाटे का अनुमान लगाया है।  

India Ratings के मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 में खुदरा मुद्रास्फीति 5.1 फीसद जबकि थोक मुद्रास्फीति (-) 1.7 फीसद पर रह सकती है। 

वैश्विक रेटिंग एजेंसी Fitch ने भी चालू वित्त वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था में संकुचन का अनुमान लगाया है। एजेंसी के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर (-) 10.5 फीसद पर रह सकती है।

दोनों एजेंसियों ने जून तिमाही के जीडीपी से जुड़े आंकड़े के सामने आने के बाद विकास दर से जुड़े अनुमान में यह संशोधन किया है। वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर (-) 23.9 फीसद पर रही। कोरोनावायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए लागू देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार में यह गिरावट दर्ज की गई है।

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