घर खरीदने वालों को झटका! पिछले 4 सालों में 59% महंगे हुए घर, क्या अब आपका आशियाना खरीदना होगा और मुश्किल?
Real Estate Rate Hiked: देश के 7 प्रमुख शहरों में 2021 से 2025 के बीच प्रॉपर्टी की कीमतें 59% तक ...और पढ़ें

घर खरीदने वालों को बड़ा झटका! पिछले 4 सालों में 59% महंगे हुए घर, क्या अब आपका आशियाना खरीदना होगा और मुश्किल
HighLights
2021-2025 में 7 शहरों में प्रॉपर्टी 59% महंगी हुई।
जमीन और निर्माण लागत में भारी वृद्धि मुख्य कारण।
मध्य पूर्व संकट ने भी निर्माण लागत बढ़ाई।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। जब भी इनवेस्टमेंट की बात आती है तो लोग अक्सर रियल एस्टेट (Real Estate Investment) में निवेश करना पसंद करते हैं। इससे वो प्रॉपर्टी (Property rates in Top cities) उनकी हो जाती है, साथ ही समय के साथ उसकी कीमत भी बढ़ती रहती है। ऐसा ही कुछ साल 2021 से 2025 के बीच देश के कुछ बड़े शहरों में देखने को मिला, जहां रियल एस्टेट (Real Estate Price) के दाम 50% से भी ज्यादा बढ़ गए। इसके अलावा घर बनाने की लागत में इस दौरान काफी ज्यादा अंतर देखा गया।
तो आखिर रियल एस्टेट सेक्टर में इस तेजी की क्या वजह रही? अगर आज घर बनवाना हो तो कितनी लागत आएगी, आइए विस्तार से जानते हैं।
कितने बढ़े दाम?
हाल ही में एनारॉक रिसर्च की एक रिपोर्ट सामने आई। जहां देश के टॉप 7 शहरों में प्रॉपर्टी के दामों में काफी उछाल देखा गया। साल 2021 से 2025 के बीच देश के सात बड़े शहरों में हाउसिंग प्रॉपर्टी (Housing Property) की कीमतें 59% तक बढ़ी। वहीं बताया जा रहा है कि इसका मुख्य कारण जमीन के बढ़ते दाम और कॉन्स्ट्रक्शन कॉस्ट (Construction Cost) में इजाफा होना है।
कीमतों और लागत में अंतर
प्रॉपर्टी के दामों की बात करें तो, जो घर औसतन ₹5826 प्रति वर्ग फीट मिलते थे, वो 2025 में बढ़कर ₹9260 प्रति वर्ग फीट पर पहुंच गए। यानी कि इसमें करीब 12% की सालाना तेजी देखी गई।
वहीं अगर कॉन्स्ट्रक्शन कॉस्ट की बात करें तो एक एवरेज घर बनाने में 2021 में ₹2681 प्रति वर्ग फीट लगता था वो 2025 में बढ़कर ₹3604 प्रति वर्ग फीट पर आ गया। यानी कि यहां पर कॉन्स्ट्रक्शन कॉस्ट में करीब हर साल करीब 6.9% का इजाफा हुआ।
एनारॉक रिसर्च बताती है कि मकानों की कीमतों बढ़ने में 66% हिस्सा कॉन्स्ट्रक्शन कॉस्ट का है, जबकि बाकी का 34% हिस्सा जमीन की कीमतें, डेवलपर्स का मार्जिन और सप्लाई पर निर्भर करता है।
जमीन के दामों में भी उछाल
पिछले 5 सालों में प्रमुख शहरों में जमीन की कीमतें लगभग 50% से 120% तक महंगी हो गई हैं। एनसीआर (NCR) की बात करें तो यहां 5 सालों में दीमन के दामों में 70% से 130% तक की बढ़ोतरी देखी गई। तो वहीं बेंगलुरु (Bengluru) में भी कीमतों में 60% से 120% की तेजी देखी गई।
रियल एस्टेट एक्सपर्ट का मानना है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास और लोकेशन की मांग के चलते प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही जमीनें काफी महंगी हो जाती हैं, जिससे घर खरीदना आम आदमी के लिए काफी मुश्किल हो जाता है।
मिडिल ईस्ट वॉर का भी असर
मालूम हो मिडिल ईस्ट में तनाव (Crisis in Middle East) की स्थिति के कारण भी कंस्ट्रक्शन पर प्रेशर बढ़ा। आपको जानकार हैरानी होगी कि सिर्फ मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से रियल एस्टेट सेक्टर में 8% से 10% तक की बढ़ोतरी देखी गई। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि भारत कंस्ट्रक्शन में काम आने वाली कई सारी चीजों का एक्सपोर्ट करता है। जिसकी वजह से कीमतों में इजाफा देखा गया।
किन-किन चीजों पर पड़ा असर?
- TMT बार की कीमतें करीब 20% बढ़कर ₹72,000 प्रति टन के आसपास पहुंच गई हैं।
- लॉजिस्टिक्स और ईंधन के खर्च में 15% से 20% तक की तेजी आई है।
- टाइल्स, कांच और हार्डवेयर 8% से 12% तक महंगे हो गए हैं, जबकि बिजली-प्लंबिंग (MEP) का खर्च 9% से 13% बढ़ा है।
- मजदूरी प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा हिस्सा (25-30%) है, हालांकि इसमें 5% से 6% की ही मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। सीमेंट के दाम भी 4% से 5% तक बढ़े हैं।
देखा जाए तो बढ़ती लागत के कारण उन प्रोजेक्ट्स के मुनाफे पर असर पड़ सकता है जो पहले ही लॉन्च और बिक चुके हैं, क्योंकि वहां डेवलपर्स के लिए कीमतें बढ़ाना मुश्किल होता है।
