नई दिल्ली। नकदी संकट से जूझ रहीं मिलें अक्टूबर से शुरू हो रहे गन्ना वर्ष 2015-16 में 40 टन चीनी अनिवार्य रूप से निर्यात करें। किसानों का करीब 14,000 करोड़ का गन्ना मूल्य बकाया खत्म करने के लिए केंद्र ने मिलों को यह निर्देश दिया है। चीनी मिलों को यह निर्यात अगले महीने से शुरू करना होगा।

उत्पादन की अधिकता से देश में चीनी का अतिरिक्त भंडार जमा हो गया है। इस कारण कीमतें 30 रुपये प्रति किलो से भी नीचे आ गई हैं। चालू वर्ष में चीनी का उत्पादन 2.83 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर रहने का अनुमान है।

मिलों के शीर्ष संगठन इस्मा ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे बाजार में चीनी की धारणा सुधरनी चाहिए। जहां तक भारत से चीनी निर्यात का सवाल है तो मौजूदा स्थिति में व्यावहारिक नहीं लग रहा है। इसकी वजह यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम काफी नीचे चल रहे हैं। ऐसे में सरकार की मदद के बिना कोई निर्यात संभव नहीं है।

खाद्य मंत्रलय की ओर से शुक्रवार को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि मिलों को अक्टूबर, 2015 से सितंबर, 2016 के लिए चालीस लाख टन चीनी निर्यात का कोटा तय किया गया है। इसके तहत सभी ग्रेड की चीनी शामिल है। अगर कोटे के तहत आवंटित चीनी का निर्यात नहीं किया गया तो इसे सरकारी निर्देश का उल्लंघन माना जाएगा। माना जा रहा है कि निर्यात कोटा तय करने का कदम राकांपा सुप्रीमो शरद पवार की इसी हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बाद उठाया गया है।

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Posted By: Shashi Bhushan Kumar

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