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    ट्रंप ने माना रूसी तेल नहीं खरीद रहा भारत, अब व्यापार समझौते के लिए टैरिफ हटाने का दबाव बनाना जरूरी

    Updated: Wed, 12 Nov 2025 03:00 PM (IST)

    India-US trade deal: रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। अब ट्रंप ने स्वीकार किया है कि रूस से भारत क ...और पढ़ें

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    अमेरिका पर ‘ऑयल टैरिफ’ हटाने का दबाव बनाए भारत

    India-US trade deal: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 11 नवंबर 2025 को व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम में कहा कि भारत ने रूसी तेल खरीदना काफी हद तक बंद कर दिया है, और हम टैरिफ कम करने जा रहे हैं। ट्रंप के इस बयान के बाद विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को किसी भी व्यापार समझौते पर आगे बढ़ने से पहले अमेरिका से 25 प्रतिशत ‘रूसी तेल’ टैरिफ वापस लेने का आग्रह करना चाहिए।

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    ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका और भारत एक व्यापार समझौते के काफी करीब हैं। उन्होंने भारत पर टैरिफ कम करने का वादा किया। उन्होंने कहा कि ऊंचे टैरिफ इसलिए लगाए गए क्योंकि भारत रूस से तेल आयात कर रहा था। उसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने रूसी तेल खरीदना काफी हद तक बंद कर दिया है।

    ट्रंप टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई

    ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट एक टैरिफ मामले की सुनवाई शुरू कर रहा है। इसमें यह पूछा गया है कि क्या राष्ट्रपति को अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) के तहत ऐसे शुल्क लगाने का अधिकार है। कई निचली अदालतों ने यह सवाल उठाया कि क्या कानून ऐसे व्यापक अधिकार देता है। अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के खिलाफ फैसला सुनाता है, तो ये शुल्क अवैध हो जाएंगे। इससे वैश्विक व्यापार का स्वरूप एक बार फिर बदल सकता है। अमेरिका-भारत ट्रेड वार्ता पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।

    मंगलवार को ही वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार अमेरिका के साथ एक निष्पक्ष, समतापूर्ण और संतुलित व्यापार समझौता करने का प्रयास कर रही है। साथ ही, हर आकस्मिक स्थिति के लिए तैयारी भी कर रही है। राष्ट्रीय राजधानी स्थित सुषमा स्वराज भवन में उद्योग समागम-2025 में गोयल ने कहा कि व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में राष्ट्रीय हित सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

    रूसी तेल के नाम पर लगा टैरिफ हटाना जरूरी

    थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, भारत को पहले प्रतिबंधित रूसी तेल से पूरी तरह बाहर निकलना चाहिए, फिर प्रतिस्पर्धात्मकता बहाल करने के लिए अमेरिका से 25 प्रतिशत ‘रूसी तेल’ टैरिफ खत्म करने के लिए चाहिए। उसके बाद ही अमेरिका के साथ समान शर्तों पर व्यापार वार्ता शुरू करनी चाहिए।

    GTRI ने इसके तीन चरण बताए हैंः
    1. भारत प्रतिबंधित रूसी कंपनियों से तेल आयात बंद करें। ट्रंप ने स्वीकार किया है कि भारत ने बड़े पैमाने पर ऐसा किया है, इसलिए पहला चरण पूरा हो गया है।
    2. व्यापार वार्ता से पहले भारत टैरिफ में कटौती सुनिश्चित करे। रूसी तेल आयात में कटौती के साथ भारत को वॉशिंगटन पर 25% ‘रूसी तेल’ टैरिफ हटाने का दबाव बनाना चाहिए। इससे भारतीय वस्तुओं पर कुल अमेरिकी शुल्क का बोझ 50% से घटकर 25% हो जाएगा। इससे कपड़ा, रत्न एवं आभूषण और दवा जैसे क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
    3. भारत 25% टैरिफ हटने के बाद व्यापार वार्ता शुरू करे। इसका लक्ष्य यूरोपीय यूनियन जैसे साझीदारों के साथ समानता और औसतन 15% टैरिफ हो।

    GTRI का कहना है कि भारत ट्रंप टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी इंतजार कर सकता है। कोर्ट पहले के फैसलों को बरकरार रख सकता है और टैरिफ को रद्द कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो भारत एकतरफा शुल्कों के दबाव से मुक्त होकर, अमेरिका के साथ एक निष्पक्ष और दूरदर्शी व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की स्थिति में होगा।

    ट्रंप टैरिफ से गिरा अमेरिका को निर्यात

    टैरिफ के कारण भारत से अमेरिका को निर्यात गिरा है। मई और सितंबर 2025 के बीच निर्यात में 37.5 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 8.8 अरब डॉलर से घटकर 5.5 अरब डॉलर रह गया। ट्रंप ने 2 अप्रैल से सभी देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। लेकिन भारत पर पहले इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत और अगस्त के अंत में 50 प्रतिशत कर दिया।

    टैरिफ-मुक्त उत्पाद, जो भारत के कुल निर्यात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा हैं, में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। इनमें दवाएं भी शामिल हैं। GTRI के अनुसार, दवा उत्पादों का निर्यात 15.7 प्रतिशत गिरकर 74.5 करोड़ डॉलर से 62.83 करोड़ डॉलर रह गया। इंडस्ट्रियल मेटल और ऑटो पार्ट्स के निर्यात में इस दौरान 16.7 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 0.6 अरब डॉलर की तुलना में 0.5 अरब डॉलर रह गया।

    अमेरिका को भारत के निर्यात में लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वैलरी, केमिकल, खाद्य पदार्थ और मशीनरी जैसे श्रम-सघन उत्पादों का होता है। इनके निर्यात मई के 4.8 अरब डॉलर से 33 प्रतिशत घटकर सितंबर में 3.2 अरब डॉलर का रह गया। इस दौरान जेम्स-ज्वैलरी का निर्यात 59.5 प्रतिशत, सोलर पैनल का 60.8 प्रतिशत टेक्सटाइल और गारमेंट का 37 प्रतिशत और केमिकल का 35 प्रतिशत कम हुआ।

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