मुंबई, पीटीआइ। कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के चलते लोगों की आवाजाही पर पाबंदियों के लंबे समय तक जारी रहने की आशंका जाहिर करते हुए विदेशी ब्रोकरेज फर्म BofA Securities ने वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी में छह फीसद तक के संकुचन का अनुमान जाहिर किया है। कंपनी के विश्लेषकों ने इससे पहले चार फीसद के संकुचन का अनुमान लगाया था। उसका कहना है कि अगर कोरोना वायरस के वैक्सीन के आने में देरी होती है तो जीडीपी का संकुचन 7.5 फीसद तक पहुंच सकता है। कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने मार्च में देशव्यापी लॉकडाउन लगाया था, जिससे आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गई थी।  

सरकार ने बाद में अनलॉकिंग की प्रक्रिया शुरू की लेकिन अलग-अलग इलाकों में स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन देखने को मिल रहा है। सभी विश्लेषकों ने इस वजह से चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर के नकारात्मक अंकों में रहने का अनुमान जताया है। इनमें आरबीआई के विश्लेषक भी शामिल हैं। 

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BofA Securities के विश्लेषकों ने कहा कि कोरोना के मामलों में वृद्धि के चलते मौजूदा पाबंदियां नवंबर तक जारी रह सकती हैं।

कंपनी के विश्लेषकों ने कहा है कि जून में अनलॉक 1.0 के बाद से भारत में कोविड-19 के दैनिक औसतन मरीजों की संख्या 5.8 गुना की बढ़ोत्तरी के साथ 48,661 पर पहुंच गई है।  

विश्लेषकों का कहना है कि भारत में सीमित स्तर पर स्वास्थ्य से जुड़े बुनियादी ढांचा उपलब्ध होने के बावजूद प्रतिदिन की टेस्टिंग बढ़कर चार लाख के आंकड़े तक पहुंच गई है।  

BofA Securities ने कहा है कि अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था को वैक्सीन के लिए अगर एक साल तक का इंतजार करना पड़ता है तो भारत की वास्तविक जीडीपी में 7.5 फीसद तक का संकुचन देखने को मिल सकता है। उसने कहा कि उसका पूर्व का अनुमान 5 फीसद के संकुचन का था।

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