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LPG Crisis: इस गुमनाम अफ्रीकी देश ने भारत की तरफ बढ़ाया हाथ, रसोई गैस की भारी किल्लत के बीच करेगा LPG सप्लाई?

Published: Mon, 30 Mar 2026 01:50 PM (IST)Updated: Mon, 30 Mar 2026 02:11 PM (IST)

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण भारत में रसोई गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस (LNG) की भारी कमी हो ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण पश्चिम एशिया से आपूर्ति बाधित हो गई है। ऐसे में भारत में घरेलू रसोई गैस (LPG) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की भारी कमी से निपटने के लिए भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल और गैस कंपनियां नए विकल्प तलाश रही हैं। मामले की जानकारी रखने वाले मिंट अखबार के सूत्रों के अनुसार, इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और गेल (GAIL) अंगोला की सरकारी कंपनी सोनांगोल (Sonangol) से रसोई गैस और प्राकृतिक गैस खरीदने के लिए प्रारंभिक बातचीत कर रही हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य ब्लॉक होने से क्या संकट गहराया?

होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण भारत का लगभग 90% LPG आयात ठप हो गया है। आपूर्ति संकट को देखते हुए सरकार ने घरेलू ग्राहकों को प्राथमिकता दी है। अब शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के अंतराल पर ही LPG सिलेंडर बुक किए जा सकेंगे। कतर के रास लफान (Ras Laffan) औद्योगिक शहर पर हमलों के बाद 'कतरएनर्जी' ने अपने कामकाज को लेकर 'फोर्स मेज्योर' (अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण अनुबंध पूरा करने में असमर्थता) की घोषणा कर दी है। इसके बाद भारत की 'पेट्रोनेट एलएनजी' ने भी अपने उपभोक्ताओं के लिए यही कदम उठाया है।

पहली बार अंगोला से रसोई गैस आयात की उम्मीद

अंगोला पहले से ही भारत को कच्चा तेल और LNG की आपूर्ति करता रहा है, लेकिन यदि यह समझौता पक्का हो जाता है, तो यह पहला मौका होगा जब यह मध्य अफ्रीकी देश भारत को रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति करेगा। भारतीय कंपनियां हाजिर बाजार से खरीदारी करने के बजाय अंगोला के साथ लंबी अवधि के अनुबंध करना चाहती हैं। इसमें LPG के लिए 1 साल का अनुबंध और LNG के लिए कम से कम 10 साल का अनुबंध शामिल है।

4.6 ट्रिलियन क्यूबिक फीट के प्रमाणित प्राकृतिक गैस भंडार वाले अंगोला के अलावा भारत ऑस्ट्रेलिया, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी आपूर्ति के विकल्प तलाश रहा है।

"उत्तरी अमेरिका की तुलना में अफ्रीका से आपूर्ति में 10-15 दिन कम लग सकते हैं। गैस विविधीकरण (Diversification) समय की मांग है। जो देश प्राकृतिक गैस का उत्पादन करते हैं, वे इथेन, प्रोपेन और ब्यूटेन जैसे अन्य घटक भी बनाते हैं जो LPG उत्पादन के काम आते हैं। इसलिए अंगोला सहित अफ्रीकी आपूर्तिकर्ता भारत के लिए प्रमुख विकल्प बन सकते हैं।"- इक्रा लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ

बैलेंस पॉइंट रिसर्च (Balance Point Research) के फाउंडर बेंजामिन गेज ने कहा कि संघर्ष की अवधि और कतर व यूएई में हुए बुनियादी ढांचे के नुकसान को देखते हुए, LNG आयात करने वाले देशों को अपनी निर्भरता कम करनी होगी। उन्हें "आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने के लिए संभावित रूप से प्रीमियम (अधिक कीमत) चुकाने और आयातित ऊर्जा पर निर्भर रहने के अर्थशास्त्र पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता हो सकती है।"

भारत की आयात निर्भरता कितनी है?

  • LPG: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जिसकी 60% जरूरतें आयात से पूरी होती हैं।
  • LNG: भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा आयातक है। प्राकृतिक गैस की कुल मांग का आधा हिस्सा (50%) आयात किया जाता है, जिसका अधिकांश हिस्सा कतर और यूएई सहित पश्चिम एशिया से आता है।

अंगोला की कितनी हिस्सेदारी?

वित्त वर्ष 2025 में, ओमान ($1.04 बिलियन) के बाद अंगोला भारत के लिए पांचवां सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता था, जिसने $924.26 मिलियन मूल्य की गैस आपूर्ति की थी।
इस आपूर्ति संकट का सीधा असर भारत के उर्वरक और स्टील जैसे उद्योगों पर पड़ने की आशंका है, जो अपनी प्रक्रियाओं के लिए गैस पर अत्यधिक निर्भर हैं।

भारत की अंगोला से कितनी पुरानी दोस्ती?

भारत और अंगोला के बीच संबंध अफ्रीका के प्रमुख तेल उत्पादक देश अंगोला के साथ एक मजबूत और जीवंत ऊर्जा साझेदारी पर टिके हुए हैं। ये रिश्ते अंगोला के स्वतंत्रता से पहले के समय से चले आ रहे हैं। भारत ने पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन के खिलाफ अंगोला की आजादी की लड़ाई में पूरा समर्थन दिया था और 1975 में जब अंगोला स्वतंत्र हुआ, तब भी यह साथ बना रहा। उसके बाद से भारतीय नेतृत्व ने अंगोला की सत्ताधारी पार्टी एमपीएलए (पॉपुलर मूवमेंट फॉर द लिबरेशन ऑफ अंगोला) के साथ मजबूत और निरंतर संबंध बनाए रखे हैं। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध 1985 में स्थापित हुए थे। अंगोला और भारत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का सहयोग करते आए हैं और एक-दूसरे की उम्मीदवारियों का समर्थन भी करते रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत से अंगोला की पहली उच्चस्तरीय यात्रा मई 1986 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने की थी। इसका जवाब अप्रैल 1987 में अंगोला के राष्ट्रपति जोस एडुआर्डो दोस सांतोस ने भारत की यात्रा करके दिया। 2009 में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इटली के लैक्विला में जी-8 सम्मेलन के मौके पर राष्ट्रपति जोस सांतोस से मुलाकात की थी। 2021-22 से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है और कोविड से पहले के स्तर को पार कर गया है। 2021-22 में कुल व्यापार 3.2 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें अंगोला को भारतीय निर्यात में 452 मिलियन डॉलर का रिकॉर्ड उछाल आया (यानी पिछले साल की तुलना में 45% की बढ़ोतरी)। 2022-23 में (फरवरी 2023 तक) यह व्यापार और बढ़कर 3.9 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि अंगोला को भारतीय निर्यात नई ऊंचाई पर पहुंचकर 575 मिलियन डॉलर तक जा पहुंचा।