चेन्नई, पीटीआइ। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि आरसेप से भारत की आकांक्षाएं पूरी होती नहीं दिख रही थीं। यही वजह है कि भारत ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक सहयोग (आरसेप) से बाहर रहने का फैसला किया। वित्त मंत्री का कहना था कि भारत ने बातचीत और अन्य प्रक्रियाओं को काफी वक्त दिया। इसके बावजूद देशहित में सरकार इस समझौते से अलग रही।

सीतारमण ने कहा, ‘कुछ प्रमुख सेक्टरों के लिए आरसेप से हमारी अपनी उम्मीदें और आकांक्षाएं थीं। आरसेप की पेशकश हमारी आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं थीं।’ छठे जी. रामचंद्रन मेमोरियल लेक्चर को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने पीएमसी बैंक और आइएलएंडएफएस मसलों पर भी सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि खाताधारकों और बैंकिंग सेक्टर के हितों की रक्षा के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में बैंकॉक में आरसेप की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते से भारत के अलग रहने की घोषणा की थी।

आसियान देशों ने 21वें आसियान सम्मेलन के दौरान वर्ष 2012 में नोम पेन्ह (कंबोडिया) बैठक से आरसेप पर चर्चा शुरू की थी। इसका मुख्य मकसद आसियान देशों और उसके कारोबारी सहयोगियों के बीच आधुनिक, व्यापक, उच्च गुणवत्ता-युक्त तथा परस्पर आर्थिक लाभकारी समझौता करना था।

पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक के हाल के घटनाक्रमों पर वित्त मंत्री ने कहा कि आरबीआइ इस दिशा में उचित कदम उठा रहा है। आरबीआइ कुछ ऐसे तरीकों पर काम कर रहा है जो उसकी नियामकीय भूमिका को मजबूती दें। उन्होंने कहा कि हम सब चाहते हैं कि संस्थाओं का बेहतर नियमन हो, बैंकों का बेहतर नियमन हो। उन खामियों को दुरुस्त किया जा रहा है जिनकी मदद से बैंक कई ‘फायदे’ उठा लिया करते थे। नियामक के तौर पर आरबीआइ इन सभी खामियों को दुरुस्त करने में लगा है, चौतरफा कदम उठा रहा है।

बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) के बारे में सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2007-8 से 2013 तक इसमें कई गुना बढ़ोतरी हुई। उस दौरान एनपीए बैंकों की बैलेंस शीट का बोझ बन गए थे। लेकिन अब तक कई बैंकों ने इस समस्या के निदान की दिशा में काफी काम किया है और कई बैंकों के एनपीए में उल्लेखनीय कमी भी आई है। उन्होंने माना कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से भी उनकी बात हुई है कि बैंकों की संपत्तियों की रेटिंग सुधारने और स्थिर रखने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

पिछले कुछ महीनों के दौरान ऑटो सेक्टर की बिक्री में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अक्टूबर के त्योहारी सीजन को छोड़ दें, तो इस पूरे वर्ष के दौरान वाहनों का बिक्री आंकड़ा संतोषजनक नहीं रहा है। वाहन उद्योग की बिक्री घटने के कारणों के बारे में अपनी टिप्पणियों को लेकर वित्त मंत्री की आलोचना भी हुई है। लेकिन उन्होंने कहा कि बहुत से ग्राहक बीएस-6 मानक आधारित वाहनों का इंतजार कर रहे हैं, जो अगले वर्ष अप्रैल से लागू होने जा रहा है।

वित्त मंत्री ने बैंकिंग सेक्टर की चिंताएं दूर करने की भी प्रतिबद्धता जताई

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि बैंकों को विस्तार का निर्णय लेने से पहले अपनी क्षमता का भली-भांति आंकलन कर लेना चाहिए। सीतारमण ने सिटी यूनियन बैंक के स्थापना दिवस में कहा कि बैंक जैसे संस्थानों को अपनी क्षमताओं की पहचान करनी चाहिए और उसी हिसाब से अपने ग्राहकों को सेवाएं देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बैंकों को गैर-जरूरी विस्तार से बचना चाहिए।

आजकल बैंकों के विस्तार का चलन एक बीमारी की तरह बन गया है। बैंक सोचते हैं कि कल को हम आज के मुकाबले तीन गुना विस्तार कर लेंगे, इस समय हम सिर्फ छह राज्यों में हैं, आगे पूरे भारत में हमें अपनी अपनी शाखाएं खोलनी चाहिए। बैंक नफा-नुकसान को ध्यान में रखे बिना लगातार विस्तार की कोशिशें करते हैं। विस्तार के किसी निर्णय से पहले बैंकों को अपना मूल्यांकन करना चाहिए।

सीतारमण ने कहा कि आरबीआइ बताएगा कि बैंक विस्तार करने की हैसियत में हैं या नहीं। इस दौरान उन्होंने सिटी यूनियन बैंक की तारीफ भी की। वित्त मंत्री ने कहा कि जिस वित्तीय संस्था के नाम के अंत में बैंक शब्द जुड़ा हुआ है, उसकी कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में रहती है, लेकिन सिटी बैंक ने 115 वर्षो से शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि वित्तीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली में थोड़ी समस्या आने पर ही उन पर सवाल खड़े होने लगते हैं।

वित्त मंत्री का कहना था कि अगर बैंकों की गतिविधियों में स्थायित्व नहीं आएगा, तो इससे उसके ग्राहक भी प्रभावित होंगे। इसके साथ ही सेक्टर को भी यह नकारात्मक रूप में प्रभावित करेगा। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय के दौरान कई बैंकों ने इसी सिद्धांत के तहत अपनी शाखाओं की संख्या को समायोजित किया है। इसके अलावा सरकार भी बैंकों की संख्या घटाकर उनके परिचालन को दुरुस्त करने की कोशिशों में जुटी है। इसी के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा में दो बैंकों का विलय किया जा चुका है।

Posted By: Nitesh

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