सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

BRICS देशों से व्यापार में भारत ने गाड़े झंडे, ट्रेड दोगुना होकर पहुंचा 400 अरब डॉलर के पार; एसोचैम की रिपोर्ट

By IANSEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Fri, 11 Sep 2026 04:13 PM (IST)

पिछले 5 वर्षों में भारत का ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 417 अरब डॉलर तक पहुंच ...और पढ़ें

भारत का ब्रिक्स व्यापार 2025-26 तक 417 अरब डॉलर पहुंचा।

भारत का ब्रिक्स व्यापार 2025-26 तक 417 अरब डॉलर पहुंचा।

HighLights

  1. भारत का ब्रिक्स व्यापार 2025-26 तक 417 अरब डॉलर पहुंचा।

  2. एसोचैम ने 2030 तक निर्यात 200 अरब डॉलर का अनुमान लगाया।

  3. इंजीनियरिंग, फार्मा, वस्त्र जैसे क्षेत्रों में व्यापक अवसर।

आईएएनएस, नई दिल्ली। ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार पिछले 5 वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। एसोचैम ग्लोबल रिसर्च एंड स्ट्रेटेजी सेंटर की रिपोर्ट "द राइज ऑफ ब्रिक्स नेशंस: एन अपॉर्च्युनिटी टू स्केल इंडियन एक्सपोर्ट्स टू 200 बिलियन डॉलर टू ब्रिक्स बाय 2030" के अनुसार, भारत का ब्रिक्स देशों के साथ कुल व्यापार 2020-21 के 203 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 417 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो यह दर्शाती है कि ब्रिक्स समूह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक और व्यापारिक साझेदार के रूप में उभर रहा है।

एसोचैम की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स सदस्य देशों (BRICS) को भारत का निर्यात 96 अरब डॉलर रहा। एसोचैम का अनुमान है कि अगर भारत दक्षिण-दक्षिण सहयोग को और मजबूत करता है तथा पारंपरिक निर्यात बाजारों से आगे बढ़कर नए अवसरों का लाभ उठाता है, तो वर्ष 2030 तक ब्रिक्स देशों को उसका निर्यात 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

ये सेक्टर देंगे व्यापार को नई गति

रिपोर्ट में कहा गया है कि विस्तार कर रहे ब्रिक्स प्लस आर्थिक परिदृश्य से भारतीय उद्योगों को व्यापक अवसर मिल सकते हैं, जिनमें इंजीनियरिंग उत्पाद, दवा उद्योग, रसायन, वस्त्र एवं परिधान, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, खनिज एवं धातु उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, कृषि एवं समुद्री उत्पाद, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवाएं और डिजिटल सेवाएं जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं।

एसोचैम का कहना है कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार की दिशा सदस्य देशों की आर्थिक वृद्धि, व्यापार नीतियों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होती रहेगी। भारत के लिए अवसर केवल माल निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्पादन नेटवर्क, सोर्सिंग शृंखलाओं, मूल्य संवर्धन तंत्र, प्रौद्योगिकी सहयोग और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को मजबूत करने तक भी फैले हुए हैं। इसके साथ ही भारत अन्य सदस्य देशों द्वारा विकसित सफल आर्थिक मॉडलों और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं से भी सीख सकता है।

GDP ने भी पकड़ी रफ्तार

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान लगातार 7 प्रतिशत से अधिक की औसत आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखी है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जिससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए हुए है।

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि ब्रिक्स के भीतर विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं का बढ़ता महत्व इस बात का संकेत है कि लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के आधार पर दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि हासिल की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स ढांचे के अंतर्गत व्यापार और सीमा-पार निवेश को बढ़ावा देने वाली हालिया पहलें कई उच्च-विकास क्षेत्रों के लिए उत्प्रेरक का काम कर सकती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तनों के दौर में ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। गहरी आर्थिक भागीदारी से भारत को महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा संसाधनों, प्रौद्योगिकी और पूंजी तक बेहतर पहुंच मिल सकती है। साथ ही इससे विनिर्माण क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं और लचीली आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें- डॉलर के 'राज' पर BRICS का प्रहार! पीयूष गोयल बोले- अपनी मुद्राओं में करें व्यापार, जोड़ें पेमेंट सिस्टम