कुआलालंपुर, रॉयटर्स। 2022 में भारत के खाद्य तेल के आयात में 2% की गिरावट की उम्मीद है क्योंकि देश में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है। ऐसे में पाम तेल के आयात पर सबसे ज्यादा होगा जबकि सोया और सूरजमुखी के तेल के आयात में वृद्धि होगा। मलेशियाई पाम ऑयल काउंसिल (एमपीओसी) ने गुरुवार को यह जानकारी दी। एमपीओसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी वान आइशा वान हामिद ने एक सम्मेलन में कहा कि दुनिया के सबसे बड़े वनस्पति तेल खरीदार का तेल और वसा का कुल आयात 13.8 मिलियन टन है, जो 2021 में 14.1 मिलियन टन से कम है।

उन्होंने कहा कि यह गिरावट भारत के बढ़ते घरेलू खाद्य तेल उत्पादन और कोरोना वायरस संक्रमण स्थिति के कारण है क्योंकि पाबंदियों की वजह से होटल, रेस्तरां और खानपान क्षेत्रों में खपत कम हुई है। भारत आयात के माध्यम से दो-तिहाई से अधिक खाद्य तेल की मांग को पूरा करता है, जिसमें पाम तेल के मुख्य रूप से शीर्ष उत्पादकों इंडोनेशिया और मलेशिया से कुल 60% से अधिक आयात किया जाता है। लेकिन, दक्षिण एशियाई देश स्थानीय तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देकर विदेशी खरीद को कम करने की कोशिश कर रहा है।

वान आइशा ने कहा कि रेपसीड ऑयल और सरसों के तेल के उत्पादन में वृद्धि के कारण इस साल भारत में घरेलू उत्पादन 600,000 टन बढ़कर 11.8 मिलियन टन होने का अनुमान है। भारत ने पिछले महीने कहा था कि वह दिसंबर 2022 तक रिफाइंड पाम तेल के आयात की अनुमति देगा और रिकॉर्ड कीमतों को कम करने के लिए मार्च तक आयात करों में कटौती करेगा।

वान आइशा ने कहा, "ये उपाय भारतीय खाद्य तेल उद्योग के खरीद पैटर्न को प्रभावित करेंगे और भारत में पाम तेल के आयात की समग्र गतिशीलता पर भी प्रभाव डालेंगे।" उन्होंने कहा कि भारत का पाम तेल आयात 2022 में घटकर 81 लाख टन होता दिख रहा है, जो पिछले साल 85 लाख टन था।

सोया तेल का आयात 2021 में 3.1 मिलियन टन से बढ़कर 3.2 मिलियन टन होता दिख रहा है जबकि सूरजमुखी तेल का आयात पिछले साल के 1.8 मिलियन टन से बढ़कर 1.9 मिलियन टन हो जाना चाहिए।

Edited By: Lakshya Kumar