नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। डॉलर के मजबूत होने और रुपये की गिरावट के जारी रहने से न सिर्फ आम आदमी की चिंताएं बढ़ती है, बल्कि इससे आरबीआई भी हरकत में आने के संकेत दे देता है। भले ही आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा हो कि रुपये की इस गिरावट से चिंता की कोई बात नहीं, लेकिन इस संकट को नकारा नहीं जा सकता। गौरतलब है कि मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 70 के स्तर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे न्यूनतम स्तर है। दिन के कारोबार में रुपया 23 पैसे की बढ़त के साथ 69.68 पर खुला था। लेकिन थोड़ी ही देर में रुपया गोता लगाते हुए 70 तक जा पहुंचा।

भारतीय रुपये में आई इस गिरावट की प्रमुख वजह तुर्की में जारी वित्तीय संकट को माना जा रहा है। बीते दिन तुर्की की मुद्रा लीरा में 40 फीसद तक की गिरावट देखने को मिली थी। वहीं डॉलर इंडेक्स में भी तेजी जारी है जो कि 96 के स्तर पर पहुंच गया, जिस वजह से लोग अब डॉलर को सेफ हैवन मान रहे हैं।

रुपये की कमजोरी से किसे फायदा किसे नुकसान?

आयातकों के लिए बुरी खबर: रुपये में आई इस गिरावट से आयातकों को नुकसान होगा। क्योंकि रुपये में गिरावट से भारत आने वाले सामानों की लागत बढ़ जाएगी। जब रुपया कमजोर होता है तब आयातक विशेषकर तेल कंपनियों एवं अन्य आयात निर्भर कंपनियों को डॉलर के बराबर अपने रुपयों की निकासी करनी होती है। दूसरे शब्दों में कमजोर रुपया एक तरह के आयात शुल्क की तर्ज पर काम करता है।

निर्यातकों की चांदी: ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि रुपये की कमजोरी से सिर्फ नुकसान ही होते हैं, रुपये का कमजोर होना कई मायनों में देश के लिए फायदेमंद भी है। रुपये के कमजोर होने से सबसे बड़ा फायदा निर्यातकों को होता है। रुपये की कमजोरी यानी डॉलर के मजबूत होने से आईटी और फॉर्मा के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर को फायदा होता है। इन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की ज्यादा कमाई एक्सपोर्ट बेस्ड होती है। ऐसे में डॉलर की मजबूती से टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी आईटी कंपनियों को फायदा होता है। वहीं डॉलर की मजबूती से ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसी कंपनियों को भी फायदा होता है क्योंकि ये डॉलर में फ्यूल बेचती हैं।

Posted By: Praveen Dwivedi

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