नई दिल्ली (जेएनएन)। रिश्वत के कारण बढ़ने वाली सालाना लागत के 1.5 ट्रिलियन डॉलर से लेकर 2 ट्रिलियल डॉलर के बीच की होने का अनुमान है। यह आंकड़ा वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का दो फीसद है। यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टीन लैगार्ड ने दी है। सोमवार को वाशिंगटन में ब्रूकिंग इंस्टिट्यूशन के एक समारोह में लैगार्ड ने यह भी कहा कि अधिकांश सदस्यों के बीच इस बात को लेकर आम सहमति बन रही है कि कई देशों में भ्रष्टाचार एक बड़ा गंभीर मसला बन चुका है।

उन्होंने कहा कि हम अंतरराष्ट्रीय स्तर के उन लोगों पर गौर कर रहे हैं जो सरकारी अधिकारियों को प्रभावित करते हैं। जिस तरह से ये लोग रिश्वतखोरी जैसे अप्रत्यक्ष तरीकों से भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं, वो प्रत्यक्ष तरीकों (मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी) से भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे सकते हैं।

पनामा पेपर्स जैसे हालिया मामले के सामने आने के बाद इस तरह की सुविधा उपलब्ध करवाने वाले लोगों पर ध्यान गया है। इसके जरिए ही इन लोगों का योगदान सामने आया है और यह जांच कर पाने की कोशिश की गई है कि किस तरह से भ्रष्टाचार एक घातक तरीक से सीमाओं के पार भी पहुंच सकता है।

आईएमएफ प्रमुख ने इस बात पर भी जोर डाला है कि व्यवस्थागत भ्रष्टाचार राज्यों के समावेशी विकास और लोगों को गरीबी से बहार निकालने की क्षमता को दुर्बल कर देता है। यह एक मजबूत हिस्सा है जो व्यवसाय और किसी देश की आर्थिक क्षमता को रोकता है। लैगार्ड ने चेताया है कि भ्रष्टाचार देश में आने वालें विदेशी निवेश पर भी प्रभाव डालता है।

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