जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ताइवान को लेकर चीन के हमलावर रुख से दुनिया भर में सेमीकंडक्टर या चिप्स संकट के बादल मंडराने लगे हैं। विभिन्न एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान अकेले दुनिया को 64 प्रतिशत चिप की सप्लाई करता है और इसमें आधे से अधिक की हिस्सेदारी ताइवान की सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी (टीएसएमसी) की है। जानकारों का कहना है कि ताइवान पर चीन का हमला बढ़ता है तो कार से लेकर स्मार्टफोन, लैपटाप जैसे कई इलेक्ट्रानिक आइटम के साथ वाशिंग मशीन, फ्रिज जैसी कई वस्तुओं का उत्पादन प्रभावित हो जाएगा क्योंकि इन सब में चिप का इस्तेमाल होता है।

महसूस की जा रही चिप की किल्‍लत

कोरोना काल में वैश्विक स्तर पर मांग के मुकाबले चिप्स का उत्पादन नहीं हो पाया और इस वजह से अब तक चिप की किल्लत महसूस की जा रही है। इसका नतीजा यह हुआ कि भारत में आटोमोबाइल उद्योग प्रभावित हो गया और मांग के बावजूद कार कंपनियां अब भी क्षमता से कम उत्पादन कर रही है। भारत चिप्स के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है और मुख्य रूप से भारत ताइवान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया, ¨सगापुर जैसे देशों से चिप्स का आयात करता है।

चीन के हमले की आशंका बढ़ी

चीन के विरोध के बावजूद अमेरिका की स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे के बाद ताइवान पर चीन के हमले की आशंका बढ़ गई है। चीन के रुख को देखते हुए टीएसएमसी के चेयरमैन मार्क लियू ने भी साफ कर दिया है कि हमला होने पर वह चिप्स का उत्पादन नहीं कर पाएंगे।

समूचा उद्योग जगत होगा प्रभावित

औद्योगिक संगठन सीआइआइ की आइसीटीई मैन्यूफैक्च¨रग नेशनल कमेटी के चेयरमैन विनोद शर्मा ने बताया कि ताइवान पर हमला पूरी दुनिया के लिए खतरनाक साबित होगा क्योंकि चिप्स की सप्लाई चेन पहले ही उलझी हुई है। चिप्स निर्माण से जुड़े फैब को बनाने में दो साल लगते हैं। ऐसे में हमला होने पर पूरा उद्योगजगत प्रभावित होगा। फेडरेशन आफ आटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के मुताबिक चीन-ताइवान में बढ़ते टकराव को देखते हुए एक बार फिर से सेमीकंडक्टर की किल्लत का खतरा मंडराने लगा है।

भारत पर भी होगा असर

सूत्रों के मुताबिक ताइवान के संकट में आने पर भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण कार्यक्रम में भी देरी हो सकती है। सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए दोनों देशों में एडवांस बातचीत हो चुकी है और जल्द ही औपचारिक समझौता हो सकता है। लेकिन हमले की स्थिति में यह समझौता टल सकता है।

भारत भी ताइवान पर निर्भर

भारत ताइवान से सेमीकंडक्टर के साथ अन्य इलेक्ट्रानिक्स आइटम का आयात करता है और इस साल मई में ताइवान से होने वाले आयात में पिछले साल मई के मुकाबले 109 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

ताइवान पर हमला नहीं करेगा चीन

हालांकि जानकारों का यह भी कहना है कि चीन ताइवान पर इसलिए भी हमला नहीं करेगा क्योंकि चिप्स के लिए चीन खुद भी ताइवान पर काफी हद तक निर्भर करता है। शर्मा ने बताया कि चीन में एपल फोन से लेकर अन्य कई फोन निर्माता कंपनियां काम कर रही हैं। चीन ताइवान पर हमला करता है तो चीन स्थित कंपनियों का उत्पादन भी ठप हो जाएगा।

ताइवान पर निर्भर है चीन

चीन खुद भी चिप्स का निर्माण करता है, लेकिन वह सीमित मात्रा में है और चिप्स से जुड़े कई आइटम के लिए वह ताइवान पर निर्भर है। दूसरी तरफ चिप्स बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी टीएसएमसी अमेरिका में पांच नैनोमीटर सेमीकंडक्टर फैक्ट्री स्थापित कर रही है और वर्ष 2024 तक ये फैक्टरियां काम करने लगेंगी। ये नैनोमीटर सेमीकंडक्टर अभी ताइवान में बन रहे सेमीकंडक्टर को गुणवत्ता में पीछे छोड़े देंगे।

Edited By: Krishna Bihari Singh