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IDFC First बैंक फ्रॉड केस: चल गया उन 4 कर्मचारियों का पता, जिन्होंने की 600 करोड़ की हेराफेरी

Published: Fri, 27 Mar 2026 06:10 PM (IST)

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया ...और पढ़ें

फाइल फोटो

फाइल फोटो

HighLights

  1. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने 590 करोड़ के फ्रॉड केस में कार्रवाई की।

  2. चंडीगढ़ ब्रांच के चार शाखा-स्तरीय कर्मचारी निलंबित किए गए।

  3. कर्मचारियों पर रिश्वत लेने और धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप।

नई दिल्ली। चंडीगढ़ ब्रांच में 590 करोड़ के फ्रॉड केस में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank Fraud Case) ने 4 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने आईडीएफसी बैंक लिमिटेड ने बैंक की चंडीगढ़ शाखा में कथित धोखाधड़ी में भूमिका निभाने के आरोप में अपने चार शाखा स्तरीय कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।

सूत्रों ने बताया, “इन कर्मचारियों की भूमिका धोखाधड़ी को अंजाम देने में कथित रिश्वत लेने से संबंधित है।” हालांकि, बैंक अभी तक रिश्वत की रकम का पता नहीं लगा पाया है।

ब्रांच से जुड़े थे चारों कर्मचारी

सूत्रों ने कहा, "चारों कर्मचारी शाखा स्तर के हैं और चंडीगढ़ की एक विशेष शाखा से संबंधित हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि यह कोई संस्थागत मामला नहीं है। इसमें शामिल सभी कर्मचारी शाखा स्तर के हैं, और संस्थागत स्तर पर कुछ भी नहीं है।”

बैंक के सीईओ वी वैद्यनाथन ने सीएनबीसी-टीवी18 को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, “हम इस मामले में स्पष्ट रहना चाहते हैं। यह हमारे लिए बिल्कुल साफ है कि हमारे कर्मचारी इसमें शामिल हैं। हम जांच से बचना नहीं चाहते थे। 

बता दें कि फरवरी 2026 में, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में ₹590 करोड़ के एक बड़े गबन का पर्दाफाश हुआ था, जिसमें हरियाणा सरकार के खातों पर अनाधिकृत लेनदेन शामिल थे। इस मामले की जांच जारी रहने के बावजूद, बैंक की कुल जमा राशि 28 फरवरी, 2026 तक ₹2.92 लाख करोड़ पर स्थिर बनी हुई है, जो 31 दिसंबर, 2025 तक के ₹2.91 लाख करोड़ से मामूली वृद्धि है।

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उधर, इस मामले में आठ सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया गया है। एसआईटी बैंकिंग लेनदेन की गहन जांच करेगी, आरोपितों की भूमिका तय करेगी और गबन की गई राशि के अंतिम उपयोग का पता लगाएगी। दरअसल, यह घोटाला सरकारी विभागों के खातों से धन के कथित डायवर्जन से जुड़ा है। जिसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।