भारतीय शेयर बाजार के लिए बुरी खबर: HSBC ने घटाई भारत की रेटिंग, तेल की कीमतों ने क्यों बढ़ाई टेंशन?
HSBC ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मध्य पूर्व युद्ध के कारण भारतीय शेयर बाजार की रेटिंग 'न्यूट्रल' से ...और पढ़ें
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HSBC ने घटाई भारतीय शेयर बाजार की रेटिंग, कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी वजह
HighLights
HSBC ने भारतीय शेयर बाजार की रेटिंग 'अंडरवेट' की।
मध्य पूर्व युद्ध से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, चिंता।
विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं।
नई दिल्ली| दुनिया के दिग्गज ब्रोकरेज हाउस HSBC ने भारतीय शेयर बाजार को बड़ा झटका देते हुए इसकी रेटिंग को 'न्यूट्रल' से घटाकर 'अंडरवेट' कर दिया है। एक महीने के भीतर यह दूसरा मौका है जब HSBC ने भारत के प्रति अपना नजरिया बदला है। इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध और उससे आसमान छूती कच्चे तेल की कीमतें हैं।
कच्चे तेल की मार और महंगाई का डर
फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 42% का उछाल आया है और फिलहाल यह 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहा है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से न सिर्फ महंगाई बढ़ेगी, बल्कि देश की आर्थिक विकास दर (Growth) पर भी ब्रेक लग सकता है।
कमाई पर मंडरा रहा खतरा
HSBC की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा हालात में भारत अब उत्तर-पूर्वी एशियाई देशों के मुकाबले निवेश के लिए कम आकर्षक लग रहा है। इस साल अब तक निफ्टी 50 में 6.7% और सेंसेक्स में 7.9% की गिरावट आ चुकी है, जो इसे दुनिया के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले बाजारों में से एक बनाता है।
ब्रोकरेज का अनुमान है कि 2026 के लिए जो कंपनियों की कमाई (Earnings) में 16% की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया था, उसमें अब कटौती हो सकती है। गणित सीधा है- अगर कच्चे तेल की कीमतों में 20% की बढ़ोतरी होती है, तो कंपनियों की कमाई की ग्रोथ में 1.5% की गिरावट आ सकती है।
HSBC की एशियाई बाजारों की इक्विटी रणनीति और वेटेज
| बाज़ार (Market) | वेटेज (Weighting) |
| मेनलैंड चाइना | ओवरवेट |
| हांगकांग | ओवरवेट |
| सिंगापुर | ओवरवेट |
| कोरिया | अंडरवेट से न्यूट्रल |
| जापान | न्यूट्रल |
| मलेशिया | न्यूट्रल |
| फिलीपींस | न्यूट्रल |
| ताइवान | न्यूट्रल |
| इंडोनेशिया | अंडरवेट |
| भारत | न्यूट्रल से अंडरवेट |
| थाईलैंड | अंडरवेट |
विदेशी निवेशकों का पलायन
बाजार के लिए एक और चिंता की बात विदेशी निवेशकों (FPIs) का लगातार पैसा निकालना है। साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 18.5 बिलियन डॉलर निकाल चुके हैं। पिछले साल भी उन्होंने 18.9 बिलियन डॉलर की बिकवाली की थी। निवेशकों को डर है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची रहीं तो रुपया और कमजोर होगा। साथ ही, भारतीय सॉफ्टवेयर सेक्टर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते असर ने भी उनकी चिंता बढ़ा दी है।
क्या है उम्मीद की किरण?
हालांकि बाजार में SIP के जरिए घरेलू पैसा आ रहा है, लेकिन HSBC का मानना है कि बाजार को संभालने के लिए विदेशी मांग का वापस आना जरूरी है। ब्रोकरेज ने यह भी साफ किया कि भले ही पूरे बाजार पर दबाव है, लेकिन प्राइवेट बैंक, बेस मेटल्स और हेल्थकेयर जैसे चुनिंदा सेक्टर में अभी भी मौके बने हुए हैं। कुल मिलाकर, फिलहाल भारतीय इक्विटी के लिए राह थोड़ी मुश्किल नजर आ रही है।
