नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। कोरोना महामारी की दूसरी लहर भारत में भयावह रूप लेती जा रही है। इस लहर ने पूरे देश को अपनी जद में ले लिया है। कोई राज्य या जिला इससे अछूता नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई व्यक्ति कोरोनावायरस से संक्रमित हो जाता है और उसे अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत पड़ जाती है। साथ ही मेडिकल इंश्योरेंस नहीं है तो इलाज का खर्च कहां से तत्काल मैनेज किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पैसे की यकायक जरूरत पड़ने पर कई तरह के स्रोतों से पैसे जुटा सकते हैंः 

टैक्स एंड इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट बलवंत जैन कहते हैं कि कोरोना महामारी के जद में आने के बाद आप अगर आपको तत्काल ज्यादा पैसे की जरूरत पड़ती है तो सबसे पहले इमरजेंसी फंड का इस्तेमाल कीजिए। अगर कोई इमरजेंसी फंड नहीं है तो आप पीपीएफ अकाउंट से लोन ले सकते हैं या आंशिक निकासी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पीपीएफ अकाउंट के तीन साल पुराने होने के बाद आप लोन ले सकते हैं। वहीं पांच साल पुराना होने के बाद आप आंशिक निकासी कर सकते हैं। 

Optima Money Managers के फाउंडर/ सीईओ पंकज मठपाल ने कहा कि अगर कोई ऐसी परिस्थिति आ जाती है तो सबसे पहले क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना चाहिए। जहां भी संभव हो आप क्रेडिट कार्ड स्वैप करके पेमेंट कर सकते हैं क्योंकि इसमें बिल्कुल समय व्यर्थ नहीं होता। इसके साथ ही आपको भुगतान के लिए काफी समय मिल जाता है। इसके अलावा अगर आपको कैश चाहिए तो आप क्रेडिट कार्ड पर लोन ले सकते हैं। 

मठपाल ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सेविंग्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही आप गोल्ड लोन ले सकते हैं। सिक्योरिटीज के बदले लोन लिया जा सकता है। 

जैन ने तत्काल भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल के पक्ष में अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि आपके पास कैश हो तो भी जहां संभव हो क्रेडिट कार्ड से पेमेंट कीजिए क्योंकि आपको नहीं पता कि कितने पैसे लगने वाले हैं। हालांकि क्रेडिट कार्ड से कैश निकालने से बचना चाहिए। इसकी वजह है कि यह काफी महंगा होता है।  

जैन ने कहा कि क्रेडिट कार्ड से कैश की निकासी की बजाय आप अपने नियोक्ता से लोन की बात कर सकते हैं। वहीं, कर्मचारी भविष्य निधि से भी कोविड-19 से जुड़ी परिस्थितियों को कारक बताकर लोन लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन प्रतिकूल परिस्थितियों में मित्रों और रिश्तेदारों से भी उधार लिया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंवेस्टमेंट प्लानर इन्हीं वजहों से इमरजेंसी फंड बनाने पर जोर देते हैं। 

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