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मैकेनिक से बने भारत के 'सोलर किंग', चीन को टक्कर देने बनाया सस्ता सोलर पैनल और अमेरिका को बेचकर बने अरबपति

Published: Sat, 09 May 2026 05:26 PM (IST)Updated: Sat, 09 May 2026 05:28 PM (IST)

हितेश दोशी और उनके भाइयों ने ₹5,000 के कर्ज से शुरू की अपनी यात्रा को भारत की सबसे बड़ी सोलर ...और पढ़ें

भारत की सबसे बड़ी सोलर पैनल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी 'वारी एनर्जीज' की कहानी।

भारत की सबसे बड़ी सोलर पैनल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी 'वारी एनर्जीज' की कहानी। 

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नई दिल्ली। भारत में जब भी व्यापार और सफलता की बात होती है, तो दृढ़ निश्चय और दूरदर्शिता की कई कहानियां सामने आती हैं। लेकिन हितेश दोशी और उनके भाइयों (किरीट, पंकज और वीरेन) की कहानी बिल्कुल अलग है। यह कहानी है मुंबई की एक छोटी सी वर्कशॉप से शुरू होकर भारत की सबसे बड़ी सोलर पैनल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी 'वारी एनर्जीज' (Waaree Energies) के निर्माण की। एक ऐसा सफर जिसने चार भाइयों को भारत के सबसे अमीर लोगों की सूची में ला खड़ा किया। आइए जानते हैं कैसे महज ₹5,000 के कर्ज से शुरू हुई एक छोटी सी कंपनी आज ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा की वैल्यूएशन वाली ग्लोबल सोलर पावरहाउस बन गई है।

महज ₹5,000 के कर्ज से कैसे शुरू हुआ यह सफर?

हितेश चिमनलाल दोशी का जन्म महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव टुंकी में हुआ था। 1985 में वे पढ़ाई के लिए मुंबई के श्री चिनाई कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स में आए। उस समय अपनी फीस और रहने का खर्च उठाने के लिए उन्होंने एक रिश्तेदार से ₹5,000 उधार लिए और हार्डवेयर व इलेक्ट्रॉनिक सामानों की ट्रेडिंग शुरू की।

ग्रेजुएशन के बाद, उन्होंने बैंक से ₹1.5 लाख का लोन लिया और प्रेशर गेज व इंडस्ट्रियल वाल्व बनाने वाली एक छोटी सी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई। 1990 में मुंबई की इस साधारण सी फैक्ट्री से 'वारी इंस्ट्रूमेंट्स' की शुरुआत हुई। एक पारिवारिक व्यवसाय के रूप में चारों भाइयों ने मिलकर काम किया और 2000 के दशक की शुरुआत तक कंपनी को पावर इक्विपमेंट ट्रेडिंग के जरिए इंटरनेशनल लेवल तक पहुंचा दिया।

जर्मनी के एक दौरे ने कैसे बदल दी कंपनी की किस्मत?

साल 2007 हितेश दोशी और उनकी कंपनी के लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। हितेश जर्मनी में एक ट्रेड फेयर में गए थे, जहां वह सौर ऊर्जा (Solar Energy) की असीमित संभावनाओं को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने तुरंत अपना पुराना थर्मल इक्विपमेंट का बिजनेस बेच दिया और पूरी तरह से सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग में उतर गए।

उन्होंने अपनी नई कंपनी का नाम अपने गांव के पास स्थित 'वारी (Wari) मंदिर' के नाम पर Waaree Energies रखा, जो उनकी अपनी जड़ों से जुड़े रहने की निशानी था।

चीन को पछाड़कर अमेरिका के बाजार पर कैसे किया कब्जा?

शुरुआत में सोलर सेक्टर में चीन का दबदबा था, लेकिन दोशी ब्रदर्स ने हार नहीं मानी। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाई, 'मेक इन इंडिया' नीतियों का फायदा उठाया और क्वालिटी पर फोकस किया। जब अमेरिका ने चीनी सोलर पैनलों पर भारी टैरिफ (टैक्स) लगाए, तो वारी एनर्जीज ने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया और अमेरिकी बाजार में अपने निर्यात को तेजी से बढ़ाया।

आज, वारी एनर्जीज क्षमता के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी सोलर पीवी मॉड्यूल निर्माता कंपनी है। 2026 की शुरुआत तक, कंपनी की ग्लोबल सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता लगभग 22.3 GW है (जिसमें 19.7 GW भारत में और 2.6 GW अमेरिका में शामिल है)।

2024 के IPO ने कैसे चारों भाइयों को बना दिया अरबपति?

अक्टूबर 2024 में जब वारी एनर्जीज का IPO शेयर बाजार में आया, तो इसने इतिहास रच दिया। ₹4,321 करोड़ का यह इश्यू भारी डिमांड में रहा। शेयर अपने इश्यू प्राइस से 70% के प्रीमियम पर लिस्ट हुए और कुछ ही महीनों में 50% से ज्यादा उछल गए।

इस बंपर लिस्टिंग ने कंपनी की वैल्यूएशन ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंचा दी। इसी के साथ चारों दोशी भाई पहली बार 'फोर्ब्स इंडिया रिच लिस्ट 2025' में शामिल हो गए। आज उनकी कुल संपत्ति लगभग 7.5 अरब डॉलर है और वे भारत के टॉप 40 अमीरों की सूची में गिने जाते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का रेवेन्यू 27% बढ़कर ₹14,450 करोड़ और नेट प्रॉफिट 51% उछलकर ₹1,980 करोड़ हो गया है।

हितेश दोशी के नेतृत्व में यह कंपनी अब सिर्फ सोलर पैनल तक सीमित नहीं है। कंपनी ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन), एनर्जी स्टोरेज, इन्वर्टर और भविष्य की 'ग्रीन हाइड्रोजन' (Green Hydrogen) तकनीक पर तेजी से काम कर रही है। भारत सरकार के 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन के लक्ष्य को पूरा करने में वारी एनर्जीज एक अहम भूमिका निभा रही है।