नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के 45 वें राष्ट्रपति बनेंगे यह बात अब तय हो गई है। ऐसे में यह जानना और समझना बेहद जरूरी हो जाता है कि डोनाल्ड ट्रंप की इस जीत के भारत की अर्थव्यवस्था के लिए क्या मानये हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप की जीत के बाद भारत और अमेरिका के डिफेंस और व्यापारिक समझौते बेहतर हो सकते हैं। साथ ही चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए दिक्कत हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रंप ने अपने चुनावी भाषणों के दौरान पाकिस्तान को आतंकवादियों के लिए सेफ हेवन और चीन को करंसी मैन्युपलेटर घोषित करने की बात कही थी।

विशेषज्ञ का नजरिया

मिंट डायरेक्ट के रिसर्च हेड अविनाश गोरक्षकर का मानना है कि ट्रंप का राजनीतिक कैरियर कैसा रहेगा इस पर काफी कुछ निर्भर करेगा। भारत अमेरिका समेत दुनिया के तमाम देशों के लिए एक बड़ा बाजार है। ऐसे में ट्रंप निश्चित तौर पर भारत के साथ संबंध मजबूत करने का प्रयास करेंगे। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि सरंक्षणवादी नीतियों के चलते अमेरिकियों को वरीयता देने में भारत को नुकसान हो सकता है।

जानिए भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा ट्रंप की जीत का असर

चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो यह पता चलता है कि देश के लिए डेमोक्रैटिक राष्ट्रपति की तुलना में रिपब्लिकन राष्ट्रपति ज्यादा बेहतर साबित हुए हैं। हालिया इतिहास के अनुसार भारत और अमेरिकी संबंध डेमोक्रेटिक पार्टी के बिल क्लिंटन से शुरु हुए फिर रिपब्लिकन पार्टी के जॉर्ज बुश ने पद संभाला और फिर इसके बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के बराक ओबामा राष्ट्रपति बने।

जानिए भारत पर क्या कुछ असर देखने को मिल सकता है-

क्या खो सकता है भारत-

भारत सहित दुनियाभर के बाजार ट्रंप के जीत की उम्मीद नहीं कर रहे थे। यह नामुमकिन लग रहा है। ऐसे में ट्रंप के जीतने से देश और दुनिया को तगड़ा झटका लग सकता है। ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट की नीति और सभी विदेशी ट्रेड समझौतों पर दोबारा विचार करने जैसी तमाम चीजें अमेरिका और भारत के व्यापार समझौतों पर निश्चित तौर पर असर डालेगा।

ट्रंप के मुताबिक एच1बी वीजा प्रोग्राम अनुचित है और वह इसे खत्म करना चाहते हैं। यदि ट्रंप जीतते हैं तो भारतीय आईटी कंपनियों के स्टॉक्स और कंपनियां जैसे कि टीसीएस और इंफोसिस को सबसे ज्यादा मार झेलनी पड़ सकती है।

ट्रंप का भारत को लेकर हमेशा से ही दोहरा रुख देखा गया है। एक ओर वे यह कहते दिखते हैं कि भारत काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और दूसरी ओर वे यह कहते हैं कि वे भारतीयों से अमेरिकी नौकरियां वापस लेंगे। अमेरिका की नौकरी देश के बाहर न जाने देने के रवैये का सीधा सा मतलब यह है कि अब उन भारतीयों के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी जो वहां नियमित तौर पर आते-जाते रहते हैं या वहां से अपना बिजनेस संचालित कर रहे हैं।

ट्रंप यूएस के कॉरपोरेट टैक्स को 35 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी पर लाने की तैयारी में है। इससे फोर्ड, जनरल मोटर्स और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां वापस यूएस पर अपना ध्यान केंद्रित कर देंगी। इससे मोदी के मेक इन इंडिया को झटका मिल सकता है।

ट्रंप की जीत से भारत को क्या होगा हासिल

जहां एक ओर ट्रंप कड़े अप्रवासन नियमों की वकालत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे भारतीय आन्त्रप्रिन्योर और विधार्थियों को यूएस की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।

अपने पूरे कैपेंन के दौरान ट्रंप ने चीन की आलोचना की और देश को अपना सबसे बड़ा विरोधी बताया। इससे भारत को लाभ मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जीतने के बाद वे चीन को मुद्रा में छेड़छाड़ करने वाला देश घोषित कर देगा। यह नहीं अगर चीन अपने एग्रीमेंट में बदलाव नहीं करता है तो वे देश पर भारी टैरिफ थोप देंगे।

उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवादियों का शरण स्थान बताया। आतंकवाद के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप का यह कड़ा रुख भारत और अमेरिकी की रक्षात्मक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती दे सकता है। साथ ही इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक करार को भी मजबूत बल मिल सकता है।

Posted By: Surbhi Jain

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