Oil Crisis: अमेरिका-ईरान वार्ता फेल! दुनिया के सबसे अहम Hormuz Strait से 2 तेल सुपरटैंकर मुड़े, मची खलबली
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में खलबली मच गई है। फारस की खाड़ी में प्रवेश करने ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बार फिर से भारी खलबली मच गई है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता विफल होने के बाद, फारस की खाड़ी में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे दो खाली सुपरटैंकरों ने सीजफायर (युद्धविराम) पर मंडराते खतरे के बीच अंतिम समय में यू-टर्न (U-turn) ले लिया।
आखिर क्यों दो सुपरटैंकरों ने बीच रास्ते से लिया यू-टर्न?
मनीकंट्रोल के मुताबिक शिप-ट्रैकिंग डेटा पर शनिवार देर रात ओमान की खाड़ी से तीन विशाल कच्चे तेल के वाहक (VLCC) होर्मुज के संकरे जलमार्ग की ओर बढ़े। रविवार सुबह ईरान के लारक द्वीप (Larak island) के पास पहुंचने पर, दो जहाजों ने अपनी यात्रा रद्द कर दी। इनमें इराक जाने वाला Agios Fanourios था जो कि ग्रीस की ईस्टर्न मेडिटेरेनियन मैरीटाइम द्वारा प्रबंधित है। वहीं Shalamar UAE के दास द्वीप जाने वाला पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉर्पोरेशन के स्वामित्व वाला है।
हालांकि इराक और पाकिस्तान दोनों को पहले ही इस जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान से मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन इनके अचानक वापस मुड़ने का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इनका यू-टर्न ठीक उसी समय हुआ जब इस्लामाबाद में वार्ताकारों ने घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता विफल हो गया है।
तीसरे जहाज 'Mombasa B' को कैसे मिली एंट्री?
जहां दो जहाजों ने वापसी की, वहीं तीसरा विशालकाय सुपरटैंकर Mombasa B (जिसका पुराना नाम Front Forth था), लारक और केश्म (Qeshm) द्वीपों के बीच से होकर सफलतापूर्वक फारस की खाड़ी में प्रवेश कर गया। यह मार्ग ईरान द्वारा अनुमोदित है। वर्तमान में यह जहाज अपनी अंतिम मंजिल का कोई स्पष्ट संकेत नहीं दे रहा है।
यह जहाज अब Haut Brion 8 SA के स्वामित्व में है और इसका प्रबंधन दक्षिण कोरिया स्थित सिनोकोर मैरीटाइम (Sinokor Maritime) द्वारा किया जाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से दुनिया पर क्या असर पड़ रहा है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। छह सप्ताह पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से यह मार्ग प्रभावी रूप से बंद है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में अभूतपूर्व व्यवधान उत्पन्न हुआ है।
सप्ताहांत की शांति वार्ता में इस जलमार्ग को फिर से खोलना चर्चा का एक अहम मुद्दा था, लेकिन यह अभी भी असहमति का क्षेत्र बना हुआ है।
जापान को क्यों इस्तेमाल करना पड़ा अपना इमरजेंसी तेल भंडार?
जलडमरूमध्य के बंद होने से पैदा हुए गंभीर आपूर्ति संकट (Supply Crunch) से निपटने के लिए दुनिया भर के देश कड़े कदम उठा रहे हैं। जापान ने 26 मार्च से अपने राष्ट्रीय भंडार से 8.5 मिलियन किलोलीटर (लगभग एक महीने की खपत के बराबर) कच्चा तेल जारी करना शुरू कर दिया है।
शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को 'एनियोस एरो' (Eneos Arrow) तेल टैंकर को किताक्युशू (Kitakyushu) के शिराशिमा नेशनल पेट्रोलियम स्टॉकपाइलिंग बेस के ओपन-सी बर्थ पर देखा गया था, जो आपातकालीन भंडार के इस्तेमाल को दर्शाता है।
क्या आगे भी जारी रहेगा जहाजों का लौटना?
हाल के हफ्तों में कई जहाजों ने इस मार्ग से गुजरने का प्रयास किया है, लेकिन बदलती सुरक्षा स्थिति और लगातार बने हुए उच्च जोखिमों के कारण उन्हें अपने प्रयास बीच में ही छोड़ने पड़े हैं। ज्यादातर जहाज फारस की खाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नए कार्गो को लोड करने के लिए खाड़ी के अंदर खाली टैंकरों की भी भारी जरूरत है।
पिछले महीने के अंत में दो चीनी कंटेनर जहाजों ने भी यू-टर्न लिया था, हालांकि बाद में वे सफलतापूर्वक बाहर निकलने में कामयाब रहे। पिछले सप्ताह एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) वाहक भी वापस लौट गया था।
यदि रविवार को तीनों जहाज सफलतापूर्वक निकल जाते, तो यह फरवरी के अंत से ईरान द्वारा नियंत्रित इस जलमार्ग के लिए एक सकारात्मक संकेत होता। शनिवार को भी कच्चे तेल से लदे दो चीनी सुपरटैंकर और एक ग्रीक जहाज होर्मुज के रास्ते खाड़ी से बाहर निकले थे।
