नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। होम लोन पर ब्याज दरों में चल रही भारी छूट से रियल एस्टेट सेक्टर को त्योहारी सीजन में नई उम्मीद दिख रही है। रियल एस्टेट सेक्टर का मानना है कि यह त्योहारी सीजन मकान बिक्री के लिए 'टर्निग प्वाइंट' साबित हो सकता है। फिलहाल होम लोन पर ब्याज दरें सात फीसद से भी कम हो गई हैं। कई बैंक तो 6.5 फीसद की दर पर भी लोन दे रहे हैं। होम लोन की ऐसी ब्याज दरें वर्ष 2002-04 के दौरान देखी गई थी। ब्याज दर घटने से ईएमआइ काफी कम हो गई है और नए इस बाजार में नए खरीदारों की सुगबुगाहट बढ़ी है।

नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल के प्रेसिडेंट राजन बांडेलकर ने बताया कि इस समय अधिकतर बैंक 6.5 से 6.8 फीसदी की दर पर होम लोन दे रहे हैं। वर्तमान में 20 वर्षो के होम लोन पर प्रति लाख रुपये की ईएमआई 757 रुपये से शुरू हो रही है जो 20 लाख रुपये के लोन के लिए 15,140 रुपये होगी। यह रकम दिल्ली-एनसीआर में दो कमरों के औसत मासिक किराए के ही आसपास है।

बांडेलकर ने बताया कि इन आकर्षक दरों के चलते रियल एस्टेट बाजार में घरों को लेकर पूछताछ काफी तेज हो गई है और काफी लोग घर खरीद भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन में रियल एस्टेट सेक्टर को काफी बेहतर बिक्री की उम्मीद है। हाउसिंग डॉट कॉम और मकान डॉट कॉम के ग्रुप सीईओ ध्रुव अग्रवाल के मुताबिक होम लोन की ब्याज दरों में ऐतिहासिक गिरावट और अर्थव्यवस्था में मजबूत रिकवरी को देखते हुए यह त्योहारी सीजन रियल एस्टेट सेक्टर के लिए 'टर्निग प्वाइंट' साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन की बिक्री की गति आगामी तिमाही में भी जारी रह सकती है। पिछले कुछ वर्षों से मकान की कीमतों में स्थिरता कायम है और इससे भी त्योहारी सीजन में मांग निकलने में मदद मिलेगी। कोरोना में कमी के साथ टीकाकरण में तेजी से भी रियल एस्टेट सेक्टर को बिक्री में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद है। गौड़ ग्रुप के सीएमडी मनोज गौड़ ने बताया कि कोरोना संक्रमण में गिरावट के बाद से रियल एस्टेट बाजार में खरीदार और निवेशक दोनों की रुचि बढ़ी है ब्याज दरों को इस निचले स्तर पर रखने से त्योहारी सीजन में निश्चित रूप से फायदा होगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक ब्याज दरों में इस प्रकार की कमी से मकान के साथ कार व अन्य वस्तुओं की बिक्री भी बढ़ेगी। त्योहारी सीजन में कार के साथ कंज्यूमर ड्यूरेबल उत्पादों की भी खूब बिक्री होती है और इन सभी वस्तुओं की खरीदारी के लिए पहले के मुकाबले कम ब्याज दरों पर बैंक व अन्य वित्तीय कंपनियां लोन दे रही हैं।

Edited By: Ankit Kumar