नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नए नियमों से बैंक और वित्तीय संस्थाएं को फंसे कर्ज की समस्या से निपटने में सहूलियत मिलेगी। आरबीआई के नए दिशानिर्देशों के अनुसार कर्जदाताओं के बीच समझौते की अनिवार्य व्यवस्था से बैंक और वित्तीय संस्थाएं अपने फंसे कर्ज की समस्या का समाधान आइबीसी के बाहर भी कर सकते हैं। फंसे कर्ज पर बनी सशक्त समिति ने सोमवार को कहा कि इससे कर्जदाताओं को दबाव वाली संपत्ति की समाधान प्रक्रिया तेज करने में मदद मिलेगी।

पंजाब नेशनल बैंक के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन सुनील मेहता की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि कर्जदाताओं के बीच समझौते की जरूरत के जरिए आरबीआइ ने वित्तीय संस्थानों को इन्सॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आइबीसी) के बाहर समाधान की रूपरेखा को मंजूरी दी है। समिति के अन्य सदस्यों में एसबीआइ के चेयरमैन रजनीश कुमार, बैंक ऑफ बड़ौदा के एमडी व सीईओ पीएस जयकुमार तथा एसबीआइ के डिप्टी एमडी वेंकट नागेश्वर शामिल हैं। समिति ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में फंसे कर्ज के तेजी से समाधान की दिशा में सुझाव दिया है। मेहता ने कहा कि नयी रूपरेखा व्यवहारिक है। इसमें सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखा गया है। एसबीआई के चेयरमैन ने कहा कि आरबीआइ का नया मसौदा बैंक की अगुआई में समाधान की जरूरत को महत्व देता है।

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Posted By: Pawan Jayaswal

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