नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एयर इंडिया के हड़ताली पायलटों की कड़ी आलोचना करते हुए गुरुवार को कहा कि वे अपनी गैरकानूनी हड़ताल को खत्म करने के लिए वे अदालत के आदेश का खुल्लम खुल्ला और मनमर्जी से उल्लंघन नहीं कर सकते और उन्हें इसके लिए अवमानना संबंधी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

अदालत ने 200 पायलटों की हड़ताल का नेतृत्व करने वाले इंडियन पायलट्स गिल्ड [आईपीजी] की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि हमारे विचार से किसी भी वादी पक्ष को अदालत के आदेश के जान-बूझकर और खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन करने के बाद न्यायालय से कोई विशेष सहूलियत नहीं मिल सकती।

आईपीजी ने नौ मई को दूसरे पक्ष की अनुपस्थिति में एकल पीठ द्वारा इस हड़ताल को गैरकानूनी करार दिए जाने को यह कहते हुए चुनौती थी कि यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और राजीव शकधर की पीठ ने कहा कि एकल पीठ अदालत की अवमानना के मामले में हड़ताली पायलटों के मामले की सुनवाई कर सकती है। इसमें कहा गया है कि हम आपके खिलाफ सीधे अदालत की अवमानना का मामला चला सकते हैं लेकिन हम इसे एकल पीठ के लिए छोड़ देते हैं ताकि ठोस फैसला हो सके।

अदालत ने इससे पहले आईपीजी की एकल पीठ के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इस फैसले में पायलटों को चिकित्सा अवकाश और प्रदर्शन के जरिए गैरकानूनी हड़ताल को जारी रखने से रोका था।

पायलट आईपीजी के बैनर तले बोइंग 787 ड्रीमलाईनर के प्रशिक्षण के पुनर्निधारण और करियर में प्रगति से जुड़े मामले पर आंदोलन कर ररहे हैं। एयरइंडिया प्रबंधन ने अब तक 71 पायलटों को बर्खास्त कर दिया है जिनमें आईपीजी के पदाधिकारी भी शामिल हैं।

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